जस्टिस नागरत्ना बोलीं — चुनाव आयोग को स्वतंत्र रहना चाहिए : कोई भी राजनीतिक प्रभाव ना हो
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र रहना चाहिए और उस पर किसी भी तरह का राजनीतिक प्रभाव ना रहे. उन्होंने कहा कि दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को भी अपनी गरिमा बनाकर रखनी चाहिए.
पटना, 5 अप्रैल 2026. जस्टिस नागरत्ना शनिवार को पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में ‘ कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म बियोंड राइट्स : व्हाई स्ट्रक्चर मैटर्स ‘ पर चर्चा कर रही थी. जस्टिस नागरत्ना ने कहा — यदि संवैधानिक ढांचा कमजोर होता है, तो इसे संवैधानिक ब्रेकडाउन की स्थिति पैदा हो सकती है, भले ही अधिकार औपचारिक रूप से मौजूद रहे. जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में सीनियरिटी के आधार पर देश की चीफ जस्टिस बन सकती है.
जस्टिस नागरत्ना बोलीं — संस्थान एक – दूसरे की जांच करें.
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि जब संस्थाएं एक – दूसरे की जांच और निगरानी करना बंद कर देती है, तभी असली समस्या शुरू होती है. चुनाव आयोग, कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया ( कैग ) और वित्त आयोग जैसी संस्थाएं निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने में जरूरी भूमिका निभाती है . उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर कहा कि हमारे लोकतंत्र में समय पर चुनाव होने से सरकारें सही तरीके से बदलती रहती हैं. इस प्रक्रिया पर नियंत्रण का मतलब राजनीतिक मुकाबले के नियमों को अपने हाथ में लेना है.
बंगाल में चुनाव अधिकारियों को बंधक बनाया गया, सुप्रीम कोर्ट नाराज, पश्चिम के मालदा में बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने वीडियो ऑफिस घेरा. वहीं गुरुवार को सड़क पर आगजनी की इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों के संबंध में टिप्पणी की थी . दरअसल, गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाया गया था. इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी . कोर्ट ने कहा था — उन्हें 9 घंटे तक बंधक बना कर रखा . भोजन पानी तक नहीं मिला. यह घटना सोची — समझी और भड़काऊ लगती है. हमें पता है उपद्रवी कौन है , इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिरना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था ढह गई है. बेंच ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब मांगा. इस बीच सीईसी ज्ञानेश कुमार ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है.
केरल में 339 कैंडिडेट करोड़पति, 38% पर क्रिमिनल केस, 5 वर्ष में 48% बढे करोड़पति उम्मीदवार.
केरल में विधानसभा चुनाव में 38% प्रत्याशियों पर अपराधिक केस दर्ज हैं. इनमें सबसे ज्यादे 72 प्रत्याशी कांग्रेस से हैं. बीजेपी के 59 और सीपीआई ( एम ) के 51 उम्मीदवार हैं. जबकि 23% पर हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर केस दर्ज हैं .