33 फीसदी महिला आरक्षण एवं लोकसभा की 850 सीटें करने के विधेयक पर क्यों उठ रहे सवाल ?

समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों को जो तीन ड्राफ्ट बिल ( मसौदा विधेयक ) भेजे हैं, उनमें दो बड़े ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित है — पहला, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढाकर अधिकतम 850 करना और दूसरा, संसद के निचले सदन यानी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक — तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना. इन विधेयकों को गुरुवार यानी आज संसद के विशेष सत्र में पेश किया गया. पहला — केंद्र शासित प्रदेश कानून( संशोधन) विधेयक 2026. दूसरा— संविधान ( 131वां ) विधेयक 2026. तीसरा—- परिसीमन विधेयक 2026( डीलिमिटेशन बिल 2026

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026. यह 2023 में परित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित है, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को लेकर भविष्य में होने वाली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था. इसी वजह से, 2023 का यह कानून संसद में लगभग सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद कई लोगों ने चिंता जताई थी कि इस आरक्षण को लागू होने में एक दशक से भी अधिक समय लग सकता है. यदि यह तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं, तो 2029 के अगले आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है . हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इन तीनों विधेयकों की आलोचना की है. विपक्षी दलों ने इसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश बताया और इसे तुष्टिकरण की राजनीति भी करार दिया .
डीलिमिटेशन बिल पर बहस : सरकार ने कहा सभी राज्यों में 50% लोकसभा सीटें बढ़ जाएगी, विपक्ष ने बिल को लोकतंत्र पर हमला बताया.
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में डीलिमिटेशन बिल पर बहस के दौरान कहां की इस प्रक्रिया के बाद हर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 50% बढ़ जाएगी. सरकार ने गुरुवार यानी 16 अप्रैल 2026 को संसद में डीलिमिटेशन बिल पेश कर दिया है. मेघवाल ने कहा, ” सभी प्रदेशों में कुल मिलाकर लोकसभा सीटों की संख्या 815 हो जाएगी जिसमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. ” इससे पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस बिल को संसद में पेश किए जाने का विरोध किया. जिसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम विपक्ष को इस पर करारा जवाब देंगे.
राहुल गांधी बोले —‘ ये बीजेपी का खतरनाक खेल.’
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, ” बीजेपी की खतरनाक योजनाओं में से एक यह है कि वह 2019 के चुनावों में अपने फायदे के लिए सभी लोकसभा सीटों की सीमांकन प्रक्रिया अपने हिसाब से करना चाहती है. ” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विधेयक सारी शक्ति डीलिमिटेशन कमिश्नर को सौंप देंगे जिसे सरकार खुद नियुक्त और निर्देशित करेगी. उन्होंने लिखा, ” हमने देखा है कि बीजेपी यह कैसे करती है— असम और जम्मू– कश्मीर में सीमांकन प्रक्रिया को अपने पक्ष में कैसे मोड़ा. जिन क्षेत्रों और समुदायों में बीजेपी का समर्थन नहीं है, उन्हें चुनावी फायदे के लिए बांट दिया गया . राहुल गांधी ने लिखा, ” कुछ सीटों में 25 लाख मतदाता है, जबकि कुछ केवल 8 लाख. कुछ सीटों में 12 विधानसभा क्षेत्र हैं, जबकि कुछ में सिर्फ 6, कुछ सीटों को इस तरह टुकड़ों में बांटा गया है कि उनका आपसी जुड़ाव ही नहीं है, कई बार नदियों या पहाड़ों के पार तक विभाजित किया गया है. राहुल गांधी ने कहा, ” हम ( मोदी सरकार को) ओबीसी, दलित और आदिवासियों से हिस्सा चोरी नहीं करने देंगे. सरकार जाति जनगणना के आंकड़ों की अनदेखी करना चाहती है. हम दक्षिणी, पूर्वोत्तर और छोटे प्रदेशों के साथ नाइंसाफी को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे. ” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जो प्रस्ताव लेकर आई है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है और यह संशोधन सीमांकन के जरिए सत्ता पर कब्जा मजबूत करने की एक कोशिश की है.
दक्षिण भारतीय राज्यों से भेदभाव का आरोप
एक चुनावी सभा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एमके स्टालिन ने कहा, ” पड़ोसी प्रदेशों के नेता भी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर डीलिमिटेशन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. ” स्टालिन ने काला कपड़ा पहन कर और काला झंडा फहराकर डीलिमिटेशन के फैसले का विरोध किया. केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध करने के लिए स्टालिन ने अपने समर्थकों के साथ काले कपड़े भी पहन रखे थे.