लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. एनडीए के घटक दलों के साथ बीजेपी सहज दिख रही है. लेकिन विपक्षी गठबंधन सीट बंटवारे को लेकर उलझन में है. घटक दलों के साथ कई बैठकों के बावजूद किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है . सीट बंटवारे का ना तो फार्मूले हो पाया है और ना ही बातचीत के लिए कोई तारीख. सब अपनी बंशी अलग बजा रहे हैं.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
नई दिल्ली/हैदराबाद,7 जनवरी,2024.कहीं क्षेत्रीय दलों की अपेक्षा बड़ी है तो कहीं कांग्रेस अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है . उन्हें सीटों के साथ ड्राइविंग भी चाहिए.+ कांग्रेस के रवैये से घटक दलों में बेचैनी कांग्रेस के टालू रवैये से घटक दलों की बेचैनी बढ़ने लगी है. कांग्रेस राष्ट्रीय गठबंधन समिति के सदस्य सलमान खुर्शीद का बयान आया कि सीट बंटवारे के लिए रविवार यानी आज से बैठकें होगी, किंतु कांग्रेस की ओर से तत्काल कह दिया गया कि यह पार्टी का आधिकारिक बयान नहीं है. खबर है कि समिति के संयोजक मुकुल वासनिक ने घटक दलों से विमर्श करके सीट बंटवारे का फार्मूला तैयार किया है. शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट भी सौंप दी है . माना जा रहा है कि राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू होने से पहले मसला सुलझा लिया जाएगा. उन राज्यों पर भी चर्चा कर ली गई है, जहां सीटों को लेकर ज्यादा मारामारी है.+ कांग्रेस के मन में किस बात की डर. कांग्रेस को खटक रहा है कि मित्र दल उसे एक ऐसी सीटें लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं जिन पर हार की आशंका है. कांग्रेस 2019 के संसदीय चुनाव में 52 सीटें जीती थी एवं 209 सीटों पर दूसरे नंबर पर थी. इस हिसाब से 261 सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी प्रबल है. शेष 282 सीटें मित्र दलों के लिए बच जाती है. सूचना है कि कांग्रेस की दावेदारी उन सीटों पर भी है, जिन पर उसकी जमानत बच गई थी. इस हिसाब से कल 273 सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत है . ऐसे में सहयोगी दलों के पास चुनाव लड़ने के लिए 270 सीटें बच जाएगी. तीन राज्यों में कांग्रेस शून्य पर आउट हुई थी. 2014 एवं 2019 के लगातार दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी सीट नहीं मिली थी. ऐसे में दिल्ली, गुजरात, हिमाचल, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, दादर नगर हवेली, दमन दीव, नागालैंड, सिक्किम एवं त्रिपुरा है. 2019 में कांग्रेस ने देशभर में कुल 421 प्रत्याशी उतारे थे. इनमें से सिर्फ 52 पर जीत मिली. शेष 369 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था. सिर्फ तीन राज्यों, पंजाब, केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस 38 सीटों पर लड़कर कुल 31 सीटें जीती थी. बाकी 21 सीटें अन्य राज्यों में मिली, जिसके लिए उसे 383 प्रत्याशी उतारने पड़े . जवाब देने लगा है जदयू का धैर्य . सीट बंटवारे में देरी के चलते घटक दलों का धैर्य जवाब देने लगा है . इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी. जदयू के वरिष्ठ नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी ने विलंब के लिए नाराजगी भी जताई है . इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहने पर कि सीट बंटवारे पर 15 से 20 दिनों में बात होगी. जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को कमजोर करना चाह रही है.
यूपी में उलझन
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बसपा का पेंच फंसा हुआ है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मायावती से गठबंधन में शामिल होने के लिए गंभीरता से विचार करने का आग्रह कर रहे हैं और सपा प्रमुख अखिलेश यादव बसपा को जगह देने के लिए बिलकुल राजी नहीं है . इसी क्रम में मायावती ने अपने विकल्प खुले रखने का बयान देकर कांग्रेस की उलझन के साथ सपा का संदेश भी बढ़ा दिया है . बयानबाजी के बीच विवाद सुलझाने के लिए अभी तक किसी की और से पहल नहीं की जा रही है. पंजाब में कांग्रेस के साथ आपके तालमेल की संभावना लगभग खत्म हो गई है. दिल्ली में भी भारी जिच है.