
रेवंत रेड्डी व एआइएमआइएम नेता की मुलाकात से अटकलें तेज तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की यूके में एआइएमआइएम लीडर अकबरुद्दीन ओवैसी से मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है . दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों से राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी एआइएमआइएम को साथ लेकर आगामी लोकसभा चुनाव लड़ सकती है
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
हैदराबाद,21 जनवरी, 2024. क्या कांग्रेस असदुद्दीन ओवैसी की ए आई एम आई एम के साथ मतभेद सुधारने की कोशिश कर रही है? या फिर कांग्रेस लोकसभा चुनावों में असदुद्दीन को कडी टक्कर देगी? तेलंगाना की राजधानी में इन दो सवालों पर चर्चा जोरों पर है. इसकी वजह है तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी कि लंदन में ऑल इंडिया मजलिस – ए – इतेहादुल मुस्लिमीन लीडर अकबरुद्दीन ओवैसी को हैदराबाद में मुसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे अच्छे मॉडल को चयनित करने के लिए आमंत्रित करना. इसके बाद दोनों ने लंदन में एक साथ टेम्स रिवरफ्रंट परियोजना के मॉडल को देखा और समझा था. इस दौरान जो तस्वीरें सामने आई है, उन्होंने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. यह पहला मौका नहीं है जब दोनों के बीच गर्मजोशी दिखी है.
लंदन में मुलाकात से राजनीति गर्म
दोनों नेताओं की मुलाकात से तेलंगाना की राजनीतिक गरमा गई है . दोस्तों से दुश्मन बने इन नेताओं के मिलने को बड़ी राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है . चर्चा है कि कांग्रेस एआइएमआइएम से संबंध सुधारने की कोशिश कर रही है. क्या यह मुलाकात इसी का संकेत है, हालांकि दोनों तरफ से कोई भी नेता खुलकर यह नहीं कह रहा है, लेकिन सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस द्वारा एआइएमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन को इंडिया गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. यह ऐसे समय में हो रहा है, जब कुछ कांग्रेस राजनेता संभावित गठजोड़ के लिए पहले से ही मजलिस बचाओ तहरीक ( एमबीटी ) से बात कर रहे हैं .
पहले अकबरुद्दीन बने थे प्रोटेम स्पीकर
दोनों प्रतिद्वंदियों के बीच मतभेद दूर करने की चर्चा तब शुरू हुई जब रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने दिसंबर में सरकार बनाने के बाद विधानसभा में अकबरुद्दीन को प्रोटेम स्पीकर बनाया. मुख्यमंत्री ने लंदन दौरे से पहले हैदराबाद के पुराने शहर के विकास कार्य पर एआइएमआइएम विधायकों के साथ एक खास बैठक की थी. इस बीच एआइएमआइएम के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी मुख्यालय में संभावित गठजोड़ के बारे में कोई भनक तक नहीं है . नेता ने कहा कि किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम वोटरों से मामू ( केसीआर ) को वोट देने का आह्वान किया था. कांग्रेस से जुड़े नेता गठबंधन की बात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं. वरिष्ठ राजनेताओं के एक समूह ने बीते दिनों पार्टी अलग कमान से कहा कि एआइएमआइएम को इंडिया गठबंधन में शामिल क्या जाना चाहिए क्योंकि इससे न केवल तेलंगाना में बल्कि देश में अन्य जगहों पर भी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक वोट मजबूत होंगे. दरअसल, तेलंगाना में कांग्रेस के पास विधानसभा में 64 सीटें हैं, जो साधारण बहुमत की संख्या से सिर्फ चार अधिक है. एआइएमआइएम के साथ आने से रेवंत रेड्डी सरकार की विधानसभा में भी मजबूती बढ़ेगी. विपक्ष द्वारा सरकार गिराए जाने की संभावना को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई है . ऐसी चर्चा है कि एआइएमआइएम के सात विधायक कांग्रेस को जरुर मदद दे सकते हैं, किंतु कांग्रेस राजनेताओं का एक समूह है जो एआईसीसी सदस्य और तेलंगाना की प्रभारी दीपा दास मुंशी एवं अन्य सचिवों के साथ काम करते हैं. यह नेता एमबीटी विरोधी समूह के नेताओं के साथ मीटिंग भी कर रहे हैं.
विरोधी दलों से भी चल रही है बात
कांग्रेस नेता ने एआइएमआइएम के साथ गठबंधन पर कहा कि हम लोकसभा चुनावों में एआइएमआइएम को उसकी जगह दिखाना चाहते हैं. हमारी रणनीति हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा करके उनका मुकाबला करने की है. कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं का एक ऐसा समूह है, जो चुनाव पूर्व एआइएमआइएम से गठबंधन चाहता है. उनका मानना है कि एमबीटी एक अलग समूह है. हैदराबाद के पुराने शहर में एआइएमआइएम नहीं इसे राजनीतिक रूप से लगभग समाप्त कर दिया है. इसके नेता अमजदुल्ला खान ने टीओआई से इसकी पुष्टि की और कहा कि कुछ कांग्रेस राजनेताओं ने उनसे संपर्क किया था.
11 साल पहले बिगड़े थे संबंध
एआइएमआइएम के संयुक्त आंध्र प्रदेश के साथ केंद्र में कांग्रेस सरकारों से भी दोस्ताना संबंध थे. 2012 में कथित रूप से भड़काऊ भाषण के लिए अकबरुद्दीन को जेल जाने के बाद दोनों पार्टियों के बीच कटुता आ गई . राज्य में उसे वक्त किरण कुमार रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी . राहुल गांधी ने उसे वक्त एआइएमआइएम पर आरोप लगाया था कि यह पार्टी बीजेपी की बी — टीम है . अब तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार के बाद दोनों दलों के बीच कटु रिश्तो में सुधार के संकेत मिल रहे हैं.