तेजस्वी यादव ने बिहार में ‘ खेला ‘ होने की बात कहकर सियासत गरमा दी है. उसमें पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की भूमिका को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं . जीतन राम मांझी द्वारा सीएम का ऑफर बताए जाने के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है .
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
पटना/हैदराबाद,3 फरवरी, 2024. बिहार की सियासत में राष्ट्रीय जनता दल के सरकार से बाहर जाने और जदयू और भाजपा मिलकर एनडीए की सरकार बनाने के बाद भले ही सब कुछ शांत लग रहा हो, लेकिन अंदरखाने सियासत गरमाई हुई है. तेजस्वी यादव के बयान कि बिहार में अभी ‘ खेला ‘ बाकी है, के बाद कयासों का गर्म है. बिहार की सियासत में सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि अगर सचमुच बिहार में ‘ खेला ‘ बाकी है तो इस ‘ खेला ‘ में किसकी सबसे बड़ी भूमिका रहने वाली है? इस बीच जीतन राम मांझी का ताज़ा बयान नई उठापटक की ओर इशारा कर रहा है. दरअसल, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने नई सरकार में मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले दो मंत्री पद की मांग रखते हुए कहा है कि हमें दो मंत्री पद चाहिए, अन्यथा हमारे साथ नाइंसाफी होगी. माझी ने यह भी कहा कि हमें मुख्यमंत्री पद तक का ऑफर आया था, लेकिन हम झुके नहीं, क्योंकि हम बिकाऊ नहीं है .
जीतन राम मांझी क्यों हो गए महत्वपूर्ण ?

बिहार में एनडीए की सरकार बन गई है लेकिन फ्लोर टेस्ट होने में अभी सप्ताह भर की देरी है. साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दालों के बीच खींचतान जारी है, ऐसे में जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के पास चार विधायक हैं.मांझी के चार विधायक फिलहाल पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. इधर, राजद और सहयोगी दलों के आंकड़े को देखें तो बहुमत के मैजिक आंकड़े को हासिल करने में जीतन राम मांझी की भूमिका हम हो गई है. माना जा रहा है कि जीतन राम मांझी को अगर सीएम का ऑफर एक बार फिर गठबंधन के तरफ से मिलता है तो मांझी का दांव नीतीश सरकार के लिए भारी पड़ सकता है. जीतन राम मांझी के कदम पर गठबंधन और एनडीए दोनों की नजर है. फिलहाल मांझी कहते हैं कि हम एनडीए के साथ ही रहेंगे पर यह भी सच है कि जीतन राम मांझी बिहार की सियासत में हमेशा चौंकाने के लिए जाने जाते हैं.
मांझी क्यों है महत्वपूर्ण ?
हम के मुखिया जीतन राम मांझी अभी बिहार की सियासत के दोनों खेमों, एनडीए और महागठबंधन, के लिए हॉट केक बने हुए हैं . वे राजद की नैया पर लगाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, साथ ही वह एनडीए के लिए भी बेहद खास हैं. दरअसल, जीतन राम मांझी की पार्टी हम के चार विधायक हैं, अगर आरजेडी उन्हें अपने पाले में ले आती है, तो महागठबंधन 118 सीटों का आंकड़ा छू लेगा. ऐसे में आरजेडी के 79, कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के 16 विधायक भी शामिल है . अगर एआइएमआइएम का एक एवं एक निर्दलीय विधायक भी महागठबंधन के साथ जाते हैं तो यह आंकड़ा 120 तक पहुंच जाएगा. हालांकि सरकार बनाने के लिए दो विधायकों की तब भी जरूरत पड़ेगी. खबर है कि इसके लिए भी अंदरखाने जुगाड़ की कोशिश जारी है. सूत्र बताते हैं कि जदयू के ऐसे कई विधायकों पर जो तेजस्वी यादव को चाहते हैं, उसे पर दांव खेला जा सकता है.