व्हाइट और ब्लैक पेपर: यूपीए और एनडीए में किसकी आर्थिक नीतियां बेहतर ?

कांग्रेस और बीजेपी के बीच ताज़ा बयानबाजी में अर्थव्यवस्था एक अहम मुद्दा बन गई है.

हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.


नई दिल्ली/हैदराबाद,10 फरवरी, 2024. साल 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड प्रोगेसिव अलायंस
( यूपीए ) सरकार के दौरान आर्थिक क्षेत्र में प्रदर्शन पर बीजेपी की नेतृत्व वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस( एनडीए) ने एक श्वेत पत्र ( व्हाइट पेपर) जारी किया है. इसमें उसने 2004 से 2014 तक के समय को ‘ विनाश काल ‘ कहा है, वहीं इसकी तुलना 2014 से लेकर 2023 तक के दौर से की है जिसे उसने’
अमृतकाल ‘ कहा है. जबकि एनडीए के इस फैसले के जवाब में कांग्रेस ने ‘ 10 साल अन्यायकाल ‘ के नाम से एक ब्लैक पेपर जारी किया है. जिसमें 2014 से लेकर 2024 के बीच की बात की गई है.
दोनों ही दस्तावेज 50 से 60 पाने के हैं और इनमें आंकड़े, चार्ट, की मदद से आरोप और दावे किए गए हैं. बीजेपी के व्हाइट पेपर को यहां और यूपीए के ब्लैक पेपर को नीचे संक्षिप्त में पढ़ सकते हैं. कांग्रेस के मुताबिक, उसका दस्तावेज सताधारी बीजेपी के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक ‘ अन्यायों ‘ पर केंद्रित है एवं मोदी सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र यूपीए सरकार की आर्थिक गलतियों पर रोशनी डालने तक सीमित है. अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी का कार्यकाल भारी बेरोजगारी, नोटबंदी और आधे अधूरे तरीके से गुड्स एंड सर्विस टैक्स ( जीएसटी) व्यवस्था लागू करने जैसे विनाशकारी आर्थिक
फैसलों, अमीरों गरीबों के बीच बढ़ती खाई और निजी निवेश के कम होने के गवाह रहा है.
दूसरी तरफ बीजेपी ने बैड बैंक लोन में उछाल, बजट घाटे से भागना, कोयला से लेकर 2G स्पेक्ट्रम तक हर चीज के आवंटन में घोटालों की एक श्रृंखला और फैसला लेने में
अ क्षमता जैसे कई आरोप कांग्रेस पर लगाए हैं. बीजेपी का कहना है कि इसकी वजह से देश में निवेश की गति धीमी हुई है. विभिन्न विश्लेषण से यह पता चले की दोनों ही पार्टियां एक दूसरे के बारे में जो दावे कर रही है, कुछ हद तक वह सही बातें हैं.
सूत्र बताते हैं कि ” दोनों के आरोपों में कुछ सच्चाई है. दोनों ने बुरे फैसले लिए, कांग्रेस ने टेलिकॉम और कोयला में और बीजेपी ने नोटबंदी में” लेकिन यूपीए बनाम एनडीए के 10 वर्षों के तुलनात्मक आर्थिक आंकड़ों पर एक नजर डालने से दोनों के प्रदर्शन की मिली जुली तस्वीर सामने आती है. लेकिन सच यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक संकट के मुकाबले कोविद महामारी के कर का असर अधिक था . इसलिए ताज्जुब नहीं कि एनडीए सरकार के दौरान एक दशक का जीडीपी औसत कम रहा. स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की पूर्व अर्थशास्त्री वृंदा जागीरदार ने कहा, कोविद ने अर्थव्यवस्था के सामने जो बाधा पैदा की वह बहुत बड़ी थी . इस महामारी ने इस दशक के दौरान कुछ सालों के लिए अर्थव्यवस्था की गति धीमा कर दिया . लेकिन वृंदा जागीरदार ने यह भी कहा कि इस सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अन्य चीजों के अलावा अंतिम पायदान तक प्रशासन में सुधार करके आने वाले सालों में” तेजी से विकास” की नींव रखी है. विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी का रिकॉर्ड बेहतर दिखता है क्योंकि इसके अधिकांश कार्यकाल में तेल की कीमतें कम रही, जबकि कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान इसी वजह से महंगाई और बजट घाटा अधिक था. फिर भी कई कारकों की वजह से भूमि अधिग्रहण और फैक्ट्री के लिए पर्यावरण की मंजूरी मिलने में मुश्किलें आई . एक सच्चाई यह भी है कि भारत उस तरह व्यापार से नहीं जुड़ा है, जैसा उसे होना चाहिए.