बुधवार की सुबह कैसे बदली फिजा ? 24 घंटे के भीतर कुछ यूं बनी बात! आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बुधवार को औपचारिक रूप से गठबंधन का ऐलान हो गया लेकिन मंगलवार तक दोनों दलों के बीच गतिरोध बना हुआ था और सपा ने पांच उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर दी थी. इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि महज 24 घंटे के भीतर ही दोनों दल एक साथ आ गए और सीटों का ऐलान भी हो गया
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट.
नई दिल्ली/ लखनऊ/हैदराबाद,21 फरवरी 2024. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बुधवार को औपचारिक रूप से गठबंधन का ऐलान हो गया. पहले दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान चल रही थी और कांग्रेस के साथ एक-एक कर पार्टियां दूरी बना रही थी, लेकिन अंतत : समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने सहयोगी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मन बना लिया और सीट शेयरिंग फार्मूला भी तय हो गया, लेकिन यह फार्मूला गांधी परिवार के दखल के बाद तय हो पाया है.
सीट शेयरिंग फार्मूला
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 17 सीटों पर कांग्रेस अपनी उम्मीदवार को उतारेगी, जबकि बाकी बची 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी और आई एन डी आई ए के अन्य दल अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतरेंगे. बुधवार को सपा – कांग्रेस की संयुक्त प्रेस वार्ता में इसका ऐलान हुआ.
इनसाइड स्टोरी
कांग्रेस- सपा के बीच गठबंधन को लेकर मंगलवार तक गतिरोध जारी रहा, लेकिन बुधवार की सुबह गांधी परिवार के एक सदस्य की सूझबूझ के दम पर गठबंधन तय हो सका और दोनों दलों के बीच का गतिरोध समाप्त हुआ. साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात पर अपनी मुहर लगाई. दरअसल, पत्रकारों ने मुरादाबाद में अखिलेश यादव से सवाल किया कि क्या कांग्रेस के साथ गठबंधन होगा या नहीं? इस पर उन्होंने कहा-होगा.
गांधी परिवार का दखल और गठबंधन तय
बता दें कि सपा ने मंगलवार को आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पांच उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की थी और ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस की सपा के साथ बात नहीं बनने वाली है, क्योंकि कांग्रेस और मायावती के नेतृत्व वाली बसपा के बीच गठबंधन को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन गांधी परिवार के दखल के बाद स्थिति बदली और पार्टी की सपा के साथ दूरियां कम होने लगी. सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अखिलेश यादव से बातचीत के बाद सहमति बनी . दोनों नेताओं के बीच फोन पर बात हुई और मंगलवार तक जारी गतिरोध समाप्त हो गया. प्रियंका के साथ बातचीत के बाद अखिलेश का बयान भी सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि सपा का कांग्रेस से कोई विवाद नहीं है .
बसपा के साथ अब राह आसान नहीं
सपा और बसपा ने पिछला लोकसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ा था , लेकिन इस बार बसपा के साथ किसी भी परिस्थिति में सपा साथ नहीं आने वाली है. तभी तो बसपा नामक बादल छटने के बाद अखिलेश यादव की नजदीकियां कांग्रेस के साथ बढ़ गई . जब पत्रकारों ने कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं बयान का जिक्र किया तो इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि अब यह सब बात पुरानी हो गया. अखिलेश यादव के इस बयान से यह तो स्पष्ट है कि बसपा के लिए संभवत : कांग्रेस के दरवाजे बंद हो गए हैं. इधर सपा – कांग्रेस गठबंधन में बनी बात पर खबरें आ रही थी, तभी सपा के राष्ट्रीय सचिव ठाकुर योगेंद्र सिंह तोमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया . बुधवार को उन्होंने इस आशय का पत्र सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेज दिया. हालांकि से पहले भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव सलीम शेरवानी ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया था. इस प्रकार से समाजवादी पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
