
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार संकट में घिर गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व को लेकर सवाल उनके विधायक ही उठाने लगे हैं
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट.
शिमला/हैदराबाद,28 फरवरी,2024. मंगलवार को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट किया था और कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे. अब बुधवार यानी आज सुक्खू कैबिनेट से विक्रमादित्य सिंह ने इस्तीफा दे दिया है . विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे हैं. विक्रमादित्य सिंह सुक्खू सरकार में लोक निर्माण और शहरी विकास मंत्री थे. जबकि उनकी मां प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश के मंडी क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं . बुधवार को विक्रमादित्य सिंह मीडिया के सामने आए और कहा, हिमाचल की जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया था और हम इसे संभाल नहीं पा रहे हैं. लेकिन हमें इसकी पृष्ठभूमि में जाना होगा. जिन परिस्थितियों में कांग्रेस की सरकार बनी, उसके बारे में मैं कुछ कहना चाहता हूं. 2022 में जब हिमाचल में विधानसभा चुनाव हुआ तो सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया. पूरे कैंपेन में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नाम का इस्तेमाल किया गया. विक्रमादित्य सिंह ने कहा, ऐसी कोई होर्डिंग नहीं थी, जिस पर वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं थी. मतदान से एक दिन पहले पार्टी की तरफ से अखबारों में विज्ञापन दिया गया और वीरभद्र सिंह की तस्वीर के साथ कहा गया कि उन्हें याद रखना. जिन्होंने हमें समर्थन दिया उनके प्रति मेरी जवाबदेही है. मेरे लिए या भरोसा ज्यादा बड़ा है न कि पद. लेकिन 1 साल में विधायकों की अनदेखी हुई है . विधायकों की आवाज दबाने की कोशिश की गई है. लगातार इन विषयों को पार्टी हाई कमान के सामने उठाया गया है, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया . इसी का नतीजा है कि आज हम यहां पहुंच गए हैं . गौरतलब है कि उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश एकमात्र राज्य है, जहां कांग्रेस की सरकार है लेकिन यहां भी कांग्रेस अपनी सरकार खोती दिख रही है. लोकसभा चुनाव से पहले 15 सीटों पर राज्यसभा चुनाव को कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है. हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की 15 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार को हुए चुनाव के नतीजे कांग्रेस के मन मुताबिक नहीं रहे. इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के सहयोगी दल समाजवादी पार्टी यानी सपा को भी उत्तर प्रदेश में एक सीट पर झटका लगा है. कर्नाटक में चार सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस तीन और बीजेपी एक सीट हासिल करने में सफल रही . कांग्रेस के लिए सबसे चौंकाने वाले नतीजे हिमाचल प्रदेश से आए, जहां संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को हार मिली. इस हार के कारण हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर खतरा मंडराने लगा है. मगर यह सब संभव कैसे हुआ कि जहां कांग्रेस की जीत पक्की मानी जा रही थी, वहां भी बीजेपी आगे निकल गई? कैसे 15 राज्यसभा सीटों में से बीजेपी 10 सीटें जीतने में सफल रही?
प्रदेश में कैसे पलटी बाजी
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है. कांग्रेस की पास 40 विधायक हैं . बीजेपी के पास 25 विधायक है . तीन निर्दलीय विधायक हैं . यानी कुल 68 विधायक. कांग्रेस की तरफ से प्रत्यासी अभिषेक मनु सिंघवी थे और भाजपा की तरफ से हर्ष महाजन 2022 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. मंगलवार की सुबह जब राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू नहीं हुई थी, तब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खू मीडिया के सामने आकर बोले थे–अगर कोई बिका नहीं तो 40 के 40 विधायक हमारे साथ हैं और जीत हमारी होगी. वहीं, हिमाचल सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह और वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने भी वोटिंग से पहले आकर क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं पर बात की थी. इन तीनों नेताओं के बयानों से टीवी चैनलों पर चल रही क्रॉस वोटिंग की खबरों को बल मिला है. चुनाव नतीजों ने क्रॉस वोटिंग की अटकलें को सही भी साबित किया है. हिमाचल में जिन विधायकों क्रॉस वोटिंग की, उनके बारे में मनु सिंघवी ने कहा, यह लोग रात तक हमारे साथ बैठकर खाना खा रहे थे, सुबह 2 लोगों ने साथ में नाश्ता भी किया. इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया था कि सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस कांग्रेस के 6 विधायकों को कहीं ले गई थी. सूत्र बताते हैं कि, कांग्रेस की जिन 6 विधायकों
ने क्रॉस वोटिंग की, उनके नाम है — सुधीर शर्मा धर्मशाला, राजेंद्र राणा सुजानपुर, इंद्र दत्त लखनपाल बड़सर, रवि ठाकुर लाहौल स्पीति, चैतन्य शर्मा गगरेट, और देवेंद्र भुट्टो कुटलेहर, इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी के विधायकों को किडनैपिंग किया गया था. हालांकि भाजपा ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वह अपनी मर्जी से सरकार के खिलाफ गए हैं. उधर, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने हार के बाद कहा, बीजेपी से मैं पूछना चाहता हूं कि वह अपने अंदर झांककर देखें और इस पर विचार करें कि जब 25 सदस्यों वाली पार्टी 43 सीटों वाली पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करें तो इसका एक संदेश ही है कि हम बेशर्मी से वह करेंगे जिसकी इजाजत कानून नहीं देता है. हिमाचल में 68सीटें हैं, किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत के लिए 35 विधायक की जरूरत होती है. राज्यसभा की वोटिंग के हिसाब से देखा जाए तो अभी कांग्रेस और बीजेपी के पास 34 – 34 विधायक हैं . इस बीच कांग्रेस ने मनु सिंघवी की हार के बाद वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और डीके शिवकुमार को वर्तमान स्थिति पर नजर रखने के लिए पर्यवेक्षक बनाकर हिमाचल भेजा है
