

हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की रिपोर्ट
हैदराबाद,4 मार्च,2024. प्रत्येक माह की भांति रविवार ( 3 मार्च) को सुविख्यात साहित्यिक संस्था ” साहित्य सेवा समिति” की 109 वीं मासिक काव्य गोष्ठी सह ” हिंदी साहित्य में होली का उत्सव” विषय पर परिचर्चा बड़े ही आनंदित वातावरण में संपन्न होने की खबर है. आयोजित कार्यक्रम में पधारे हुए सभी कविगण एवं अतिथियों का भव्य अभिवादन किया गया. वहीं, गोष्ठी के प्रथम सत्र में ” हिंदी साहित्य में होली का उत्सव” विषय पर कवयित्री तथा चर्चित साहित्यकार, लेखिका गीता अग्रवाल एवं ज्योति नारायण ने बड़े ही खूबसूरत भाव से आलेख प्रस्तुत किया. कार्यक्रम आरंभ करते हुए नगर के प्रख्यात कवि व गीतकार पुरुषोत्तम कड़ेल की जो इस कार्यक्रम के सफल मंच संचालक भी रहे, सु मधुर सरस्वती वंदना से आरंभ किया. प्रथम सत्र में मंच पर विराजमान संस्थान के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार नीरज कुमार, संस्थान के कर्मठ महासचिव, सुप्रसिद्ध लेखिका, कवयित्री सुनीता लुल्ला, लेखिका गीता अग्रवाल, ज्योति नारायण, उमेश चंद्र श्रीवास्तव, कवि पुरुषोत्तम कड़ेल एवं कवि व वरिष्ठ पत्रकार देहाती विश्वनाथ, डॉ मोहन गुप्ता आदि प्रमुख महानुभावों ने अपने-अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार व लेखिका गीता अग्रवाल व ज्योति नारायण ने हिंदी साहित्य में होली उत्सव के संदर्भ में विस्तार से उल्लेख किया एवं रचनाएं सुनाई . इस दौरान कवि दर्शन सिंह ने दिवंगत हुए कुछ साहित्यकारों की होली पर आधारित रचनाओं का उल्लेख किया. इसी क्रम में साहित्य सेवा समिति के अध्यक्ष तथा प्रखर विद्वान नीरज कुमार ने उपस्थित लेखकों, कवियों और रचनाकारों से कहा कि साहित्य समाज को ऊंचाई देता है इसलिए लेखकों और कवियों को लेखन विद्या को अनवरत रखने की आवश्यकता है. गोष्ठी के द्वितीय सत्र मेंडॉ संगीता शर्मा, केपी अग्रवाल, पत्रकार राज अन्ना, दर्शन सिंह, दयाशंकर प्रसाद, मंच पर विराजमान रहे. कवि पुरुषोत्तम कड़ेल के अति सुंदर प्रभावशाली मंच संचालन में आयोजित गोष्ठी में कवियों ने होली उत्सव से लेकर विभिन्न समसामयिक विषयों पर गीत गजल एवं काव्य रचनाओं का पाठ किया . कवियों में इंदू सिंह, पूनम जोधपुरी, विनोद गिरी अनोखा, उमेश चंद्र श्रीवास्तव, कवयित्री सुनीता लुल्ला, गीता अग्रवाल, दर्शन सिंह, देहाती विश्वनाथ, सतनारायण काकड़ा, उमा देवी सोनी, डॉ संगीता शर्मा, केपी अग्रवाल, दयाशंकर प्रसाद एवं सुपरिचित कवि पुरुषोत्तम कड़ेल ने जोशीले अंदाज में अपनी रचनाएं सुनाई. तदुपरांत संगोष्ठी कार्यक्रम का समापन करते हुए साहित्य सेवा समिति की और से कवयित्री गीता अग्रवाल ने सभी को कृतज्ञ भाव से धन्यवाद दिया.