तेलंगाना में गठबंधन से नाखुश होकर कुछ नेताओं ने बीएसपी से त्यागपत्र दे दिया है . दूसरी ओर, बीआरएस नेता कोनेरू कोनप्पा ने हाल ही में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात की है.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट .

नई दिल्ली/हैदराबाद,8 मार्च, 2024. आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति और बहुजन समाज पार्टी के बीच हुई गठबंधन को लेकर कड़ी आलोचना हो रही है . गुरुवार को तेलंगाना बीएसपी प्रमुख डॉ आर एस प्रवीण कुमार ने इस कदम का बचाव करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. प्रवीण कुमार ने गठबंधन को ” ऐतिहासिक”बताते हुए कहा, जिन नेताओं में अंबेडकर, काशीराम और फुले की तस्वीरें लेकर लोगों के पास जाने की हिम्मत नहीं थी, फैसले की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है. प्रवीण कुमार बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव और उनकी” दलित विरोधी” नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं . उन्होंने पिछली केसीआर सरकार की दलित बंधु योजना की मुखालफत की थी और कहा था कि के चंद्रशेखर राव दलितों को धोखा दे रहे हैं. उन्हें एक दलित को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का अपना वादा पूरा न करने के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा था. इस संदर्भ में आलोचकों का कहना है कि, यह अजीब है कि बहुजन समाज पार्टी ने उसे पार्टी से हाथ मिला लिया है जिसके बारे में उसने कहा था कि वह दलित विरोधी पार्टी है. बीएसपी में शामिल होने से पहले प्रवीण कुमार के चंद्रशेखर राव सरकार में आईपीएस अधिकारी थे . अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए बने संस्थानों की स्थितियों में सुधार लाने के अपने काम के कारण प्रवीण कुमार अपने फॉलोअर्स तैयार कर लिए थे. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन से नाखुश होकर बीएसपी के बहुत से सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है . दूसरी ओर भारत राष्ट्र समिति नेता कोनेरू कोनप्पा ने हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात की. कोनप्पा कथित तौर पर बहुजन समाज पार्टी और भारत राष्ट्र समिति के बीच हुई गठबंधन से व्यथित थे और उनके कांग्रेस में शामिल होने की प्रबल संभावना है. कोनप्पा सिरपुर से पूर्व विधायक हैं, जहां से प्रवीण कुमार ने 2023 के विधानसभा चुनाव बीएसपी के टिकट पर लड़ा था. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि गठबंधन की मदद से हर पार्टी की ताकत बढी है. दुर्भाग्य से कुछ लोग इसे नहीं समझ पा रहे हैं. यह हास्यास्पद है कि यह लोग जिन्होंने कभी नहीं बोला, वह अब भारत राष्ट्र समिति — बीएसपी गठबंधन पर आरोप लगा रहे हैं. उधर, राजनीतिक टिप्पणीकार ई वेंकटेशु इस बात से सहमत है कि राजनीतिक पार्टियां मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर अपना रूख बदलती है. हालांकि, उनका कहना है कि गठबंधन के नतीजों पर दिलचस्प नजर रहेगी. उन्होंने कहा कि बीएसपी के तेलंगाना में एक भी सीट नहीं जीतने और भारत राष्ट्र समिति की चुनावी हार के साथ यह सवाल है कि क्या इन दो पार्टियों के गठबंधन से कुछ सकारात्मक परिणाम निकलेंगे? दरअसल, तेलंगाना में विधानसभा चुनाव से पहले एक अफवाह चल रही थी कि भारत राष्ट्र समिति ने सत्ता विरोधी वोट को विभाजित करने के लिए बीएसपी को तेलंगाना में चुनाव लड़वाया था. आर एस प्रवीण कुमार ने अपने चंद्रशेखर राव विरोधी भाषणों से लाखों युवाओं को प्रभावित किया, अब उनका क्या होगा? उधर, सीएजी ने भारत राष्ट्र समिति सरकार के तहत कालेश्वरम परियोजना, भेड़ घोटाला आदि जैसे कई घोटालों का खुलासा किया है . उन पर बीएसपी का क्या रुख है? हालांकि यह गठबंधन राजनीतिक अवसरवादिता का उदाहरण है जो लोकतंत्र के लिए खतरा है, ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है.