राधे माँ बाबाओं के बीच उभरी,देवी माँ की अनकही कहानी

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट

राधे माँ के नाम से मशहूर सुखविंदर कौर, उन कुछ महिलाओं में से एक हैं जो भारत में फैलते बाबाओं के संसार में जगह बना पाई है

मुंबई/ हैदराबाद, 19 मार्च, 2025. पंजाब के एक गांव में जन्मी सुखविंदर कौर अब मुंबई की एक हवेली में रहनेवाली राधे माँ हैं. खुद को भगवान का रूप बताने वाले बाबाओं के हेल्दी संसार में जगह बनानेवाली कुछ महिलाओं में से एक. ऐसे बाबाओं पर भ्रष्टाचार से लेकर यौन उत्पीड़न तक के आरोप लगे हैं और उनके दावों को अंधविश्वास बताया जाता है. लेकिन हजारों उनके भक्त भी हैं. एक बाबा के सत्संग में तो हुई भगदड़ में पिछले साल 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. कुछ मीडिया से जुड़े पत्रकारों ने राधे माँ से मिलकर कई अनदेखे पहलू टटोले और भक्ति और भय की इस दुनिया की परतें खोली.

राधे माँ सुखविंदर कौर से गॉड वूमेन का अनदेखा सफर
लूई वितां और गूच्ची जैसी महंगी ग्लोबल ब्रांड के पर्स हाथ में लिए, सोने और हीरे से जड़े जड़े जेवर और फैशनेबल लिबास पहने महिलाएं इकट्ठा हो रही है. यह सब राधे माँ की भक्त हैं. दिल्ली में करीब आधी रात को
शुरू होने वाले उनके दर्शन के लिए आई है . खुद को ” चमत्कारी माता” बुलाने वाली राधे माँ को संतो जैसा सादा जीवन पसंद नहीं. ना उनकी वेशभूषा साधारण है, न वे लंबे प्रवचन देती हैं . न ही सुबह के वक्त भक्तों से मिलती हैं . पत्रकारों से जब उनकी मुलाकात हुई तो बिना लाग लपेट बोली, ” यही सच है कि चमत्कार को नमस्कार है. वैसे बांदा एक रुपया भी नहीं चढ़ता चढाता. उनके साथ मिरेकल होते हैं. उनके काम होते हैं तो वे चढाते हैं. ” इन चमत्कारों की कई कहानियां है . उनके भक्त दावा करते हैं कि उनके आशीर्वाद से जिनके बच्चे नहीं हो रहे, उन्हें बच्चे हो जाते हैं. जिन्हें सिर्फ बेटियां पैदा हो रही हो, उन्हें बेटा हो जाता है . जिनका व्यापार डूब रहा हो, उन्हें मुनाफा होने लगता है. बीमार लोग स्वस्थ हो जाते हैं.

” भगवान रूपी ” होने और चमत्कार करने का दवा सिर्फ राधे माँ के ही नहीं है . भारत में ऐसे कई स्वघोषित बाबा हैं, इनकी तादाद दिनों दिन बढ़ ही रही है . कुछ पर भ्रष्टाचार से यौन उत्पीड़न तक के कई आरोप भी लगे हैं. राधे माँ पर भी ” काला जादू” करने और एक परिवार को दहेज लेने के लिए उकसाने के आरोप लगे. हालांकि, पुलिस तहकीकात के बाद सभी अदालत में खारिज हो गए. इसके बाद भी हजारों लोग इन बाबाओ और देवियों को देखने के लिए आते हैं. साल 2024 में यूपी के हाथरस में ऐसे ही एक बाबा के सत्संग में मची भगदड़ के दौरान 120 से ज्यादा लोगों की जान चली गई . अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक प्रोफेसर श्याम मानव ने मीडिया को नागपुर में बताया कि ” ज्यादातर भारतीय परिवारों में यह सामान्य संस्कार है कि जीवन का उद्देश्य ही भगवान की प्राप्ति है. इसके लिए अगर ध्यान, प्रार्थना, भजन कीर्तन किया तो सिद्धियां प्राप्त हो सकती है. सिद्धियां प्राप्त करनेवाले बाबा या देवी को लोग भगवान का रूप मानने लगते हैं जो चमत्कार कर सकते हैं.

कौन है राधे माँ के भक्त ?
आम धारणा है कि गरीब या जो लोग पढ़ लिख नहीं सकते, वे ऐसी सोच से ज्यादा प्रभावित होते हैं लेकिन राधे माँ के कई भक्त धनी और पढ़े लिखे परिवारों से आते हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सैद बिजनेस स्कूल से पढ़ाई करने वाले एक एजुकेशन कंसलटेंसी चलाने वाले पुष्पेंद्र भाटिया भी उस रात उन महिलाओं के साथ दर्शन के लिए कतार में थे. बताते हैं कि ” देवीय शक्तियों के मानव रूप” की भक्ति करने के बारे में कभी नहीं सोचा था. पुष्पिंदर कहते हैं, ” शुरुआत में मन में सवाल थे, क्या भगवान मानव रूप में आते हैं? क्या यह सच है? क्या वह ऐसे आशीर्वाद देती है कि आपकी जिंदगी बदल जाए? पुष्पेंद्र भाटिया राधे माँ के संपर्क में उस वक्त आए जब उनका परिवार एक बड़ी दुखद घटना से जूझ रहा था. कई लोग कहेंगे कि इस वजह से वे कमजोर रहे होंगे या उनको बहलाया जा सकता होगा. लेकिन वह बताते हैं कि उसे वक्त राधे माँ की बातों से उन्हें लगा कि वह सचमुच उनकी परवाह करती हैं .