हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट
लोहिया समाजवाद के प्रखर चिंतक तथा समाज सुधारक व राजनेता बदरीविशाल पित्ती की 96 वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए डॉ राममनोहर लोहिया रिसर्च फाऊंडेशन, दिल्ली के अध्यक्ष तथा समाजवादी विचारक अभिषेक रंजन सिंह ने उन्हें याद किया.
नई दिल्ली/ हैदराबाद, 28 मार्च, 2025. आज स्वर्गीय बदरीविशाल पित्ती की 96वीं जयंती है. मैं उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं. डॉ राम मनोहर लोहिया के समाजवादी आंदोलन एवं लोहिया साहित्य के प्रकाशन और प्रसार में महामना बदरीविशाल पित्ती का अप्रतिम योगदान रहा है. डॉ लोहिया की मृत्यु के बाद बदरीविशाल पित्ती ने एक मिशनरी भाव से इस कार्य को आगे बढ़ाया और समाजवादी विचारधारा को मजबूती दी. हैदराबाद स्थित डॉ राम मनोहर लोहिया ‘ समता न्यास ‘ द्वारा प्रकाशित लोहिया साहित्य युवजनों के बीच पहली पसंद बनी. अभिषेक रंजन सिंह बताते हैं, तीन वैचारिक पत्रिकाएं – जन, मैनकाइंड और चौखम्भा उस दौर की बेहद लोकप्रिय मैगज़ीन थी. इसके अलावा साहित्यिक पत्रिका ” कल्पना ” का प्रकाशन भी पित्ती जी करते थे. कल्पना ने तो हिंदी के कई साहित्यकारों को पहचान दिलाई. अभिषेक रंजन सिंह ने बताया कि डॉ राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन देश के समृद्ध पुस्तकालयों एवं विशिष्ट लोहियावादियों के निजी संग्रह से ‘ जन ‘ और ‘ मैनकाइंड ‘ के पुराने अंको का संग्रह कर रहा है. अभिषेक रंजन कहते हैं, मैं न तो डॉ लोहिया को देखा और न ही उनके समकालीन समाजवादी नेताओं को. लेकिन जन और मैनकाइंड, चौखम्भा व कल्पना पत्रिकाओं के पुराने अंको को देखकर एक बात तो समझ में आती है कि डॉ लोहिया और बदरीविशाल पित्ती ने किस विराट सोच के साथ इन पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू किया होगा. बिना ठोस विचारधारा के राजनीति नहीं हो सकती. अगर होती है तो वह समाज के लिए घातक है, क्योंकि जिस तरह कोई भटका हुआ व्यक्ति किसी दूसरे को रह नहीं दिखा सकता उसी प्रकार विचार- शून्य राजनीति और दल समाज और देश में बदलाव का वाहक नहीं हो सकता. डॉ लोहिया जीवन पर्यंत वैचारिक राजनीति के अग्रणी योद्धा बने रहे. संसोपा में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं को जन और मैनकाइंड जैसी पत्रिकाओं से खाद- पानी मिलता था. इसका संपूर्ण श्रेय बदरीविशाल पित्ती को जाता है. हैदराबाद में न सिर्फ सोशलिस्ट पार्टी का केंद्रीय कार्यालय हिमायत नगर में था, वर्ल्ड की बेगम बाजार में कमर्शियल प्रेस नामक एक छापाखाना भी था . लोहिया साहित्य और समाजवादी आंदोलन से जुड़ी सभी किताबें यहीं छपती थी. पूर्व न्यायाधीश तथा लोहिया विचार मंच, के अध्यक्ष और विशिष्ट समाजसेवी टी. गोपाल सिंह ने मुझे हैदराबाद में उन सभी महत्वपूर्ण स्थलों एवं व्यक्तियों से परिचय कराया, जो डॉक्टर लोहिया और बदरीविशाल पित्ती से जुड़े थे. मैंने पूर्व में भी कई बार जिक्र किया है कि डॉ राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाऊंडेशन द्वारा डॉक्टर लोहिया के दुर्लभ पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन एवं अनुवाद किया जा रहा है, तो इसके प्रेरक पुरुष स्वर्गीय बदरीविशाल पित्ती हैं. डॉ राममनोहर लोहिया रिसर्च फाऊंडेशन द्वारा स्व. पित्ती जी की पुण्यतिथि (6 दिसंबर) पर बीते चार वर्षो से संगोष्ठी / परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है. इसी क्रम में इस बार रांची यूनिवर्सिटी में बदरीविशाल पित्ती की याद में एक व्याख्यान कार्यक्रम भी आयोजित हुआ था. अंत में हैदराबाद की पांचवी मीनार स्वर्गीय बदरीविशाल पित्ती की 96 वीं जयंती पर उन्हें शत-शत नमन.