ममता से लेकर अखिलेश और नीतीश तक,किसे मिलेगी वोटो की ईदी ?

कांग्रेस जो यूपी में बेहद कमजोर हालत में है, वहां संभव है कि कांग्रेस दलित और मुस्लिम के गणित पर खुद आगे मजबूत होना चाहे. ऐसे में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए वाला फॉर्मूला जो अखिलेश यादव लेकर चलते हैं, उसी में कटाव हो सकता है. संभव है कि अखिलेश इसीलिए मुस्लिम वोट की ईदी अपने साथ चाहेंगे.

कोलकाता/ लखनऊ/ पटना/ हैदराबाद, 1 अप्रैल, 2025. ईद के दिन पर मित्रों और संबंधियों को दी जानेवाली सौगात’ ईदी ‘ कहा जाता है. आज बात मुस्लिम वोट वाली ईदी की तलाश करती सियासत करेंगे. 2025 यानी इसी साल होने वाले बिहार के 18% मुस्लिम वोटो की’ ईदी ‘ की चाहत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नमाजियों के बीच पहुंचते हैं. 2026 यानी अब से करीब 11 से 12 महीने बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में हर 10 में से 3 मुस्लिम वोटो वाली ‘ ईदी ‘ की चाहत में ममता बनर्जी भी ईद की नमाज के बीच मुसलमानों को संबोधित करती हैं . वह जो बयान देती हैं, उसका संबंध सिर्फ वोटो की सियासी ईदी से है. इसी तरह तीसरा अहम चुनाव देश में 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का होना है, जहां लखनऊ के ईदगाह मैदान में अखिलेश यादव पहुंचते हैं . उत्तर प्रदेश में हर 5 वोटर में 1 वोट मुस्लिम का है . क्या अखिलेश यादव को 2027 में वोट की ईदी मिलेगी ?

ममता ने किसे कहा ‘ गंदा धर्म ‘?

शुरुआत पश्चिम बंगाल से करेंगे, जहां आरोप लग रहा है कि मुसलमानों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदू धर्म को ‘ गंदा धर्म ‘ कहा. महाकुंभ को ‘ मृत्यु कुंभ ‘ कहने के बाद क्या ममता बनर्जी ने हिंदू धर्म को ‘ गंदा धर्म ‘ कहा है? मीठी सेवइयों के त्योहार ईद के दिन सियासत में क्या वोट की ईदी की चाहत ने कड़वाहट वाला बयान घोल दिया? कोलकाता में मुस्लिम नागरिकों के बीच ईद का त्योहार मनाने पहुंची ममता बनर्जी ने जो बयान दिया उस सवाल खड़ा होता है कि आखिर ममता बनर्जी ने ‘ गंदा धर्म ‘ किसे कहा? बीजेपी के आरोप पर तृणमूल कांग्रेस का दावा सुनकर लगेगा कि क्या बीजेपी वालों का हिंदू धर्म अलग है और टीएमसी का हिंदू धर्म अलग ?

ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं होगा 2026 का चुनाव
धर्म को राजनीति के मुताबिक अलग-अलग करने के पीछे वजह क्या है? क्या ममता बनर्जी इसलिए मुस्लिम वोट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं क्योंकि 2011 से लगातार सत्ता में काबिज ममता बनर्जी के लिए अब की 2026 का चुनाव आसान नहीं होगा, जैसे 2021 तक रहा . दो विधानसभा चुनावों के बीच ममता बनर्जी हिंदू वोट 4%घटा है और बीजेपी का हिंदू वोट 38% बढा है. लेकिन इन्हीं दो चुनावों के बीच ममता बनर्जी की पार्टी का मुस्लिम वोट 24% बढ़ जाता है.

ईदगाह पहुंचे अखिलेश यादव
वोट वाली ईदी तो राजनीति के ईदगाह में समाजवादी पार्टी को जमकर मिलती आई है . लेकिन अभी अखिलेश यादव यही चाहते होंगे जो मुस्लिम वोट ज्यादातर उन्हें मिल रहा है, उसको बांधकर रखें क्योंकि बीएसपी से मुस्लिम वोट छिटका है . लेकिन मुस्लिम वोटर का कुछ हिस्सा चंद्रशेखर आजाद को, ओवैसी पार्टी को या फिर मजबूत निर्दलीय प्रत्याशियों के हिस्से में चला जाता है. ऐसे में समाजवादी पार्टी चाहती है कि यह वोट उसका छिटकने ना पाए क्या इसीलिए अखिलेश यादव को साल भर ईद की सेवइयों का इंतजार रहता है. राजनीति में मुस्लिम वोट की ईदी अल्पसंख्यक वोटर हमेशा से अखिलेश यादव को देते आए हैं. फिर भी क्या समाजवादी पार्टी को यह लगता है कि मुस्लिम वोट का जो जुडाव अभी ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है, वह कांग्रेस के दांव से अलग हो सकता है ?

नीतीश को भी मुस्लिम वोट की ईदी की तलाश
वोट की ईदी नीतीश कुमार को भी बिहार में चाहिए, जहां इसी साल अक्टूबर या नवंबर में चुनाव हो जाना है. लेकिन मुस्लिम वोट ईदी नीतीश कुमार शायद तभी पाएंगे जब वह इस हाथ से दे, और उस हाथ से दे के तराजू पर वक्फ बिल को लेकर अपना स्टैंड साफ कर पाएंगे. जहां नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के सामने वक्फ बिल पर शर्तें लागू वाला मोड ऑन कर दिया है, ऐसा सूत्र बताते हैं तो क्या नीतीश वक्फ पर पलट सकते हैं ?

वक्फ बिल को लेकर साफ करना होगा रुख
रमजान के महीने में खुद इफ्तार देने से लेकर दूसरों की इफ्तार में पहुंचे नीतीश कुमार ईद के दिन भी नमाजों के बीच मौजूद होते हैं. इस बीच अहम यह है कि जब वक्फ बिल के पेश होने की तारीख तय मानी जा रही है और कहा जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश हो सकता है . तब क्या ईद के दिन ही वोट की ईदी की चिंता करते नीतीश कुमार ने कुछ शर्तें सुझाव के तौर पर रख दी है. हालांकि वक्फ बिल पर मुस्लिम संगठन ही नहीं वाकी विपक्षी दलों की निगाह भी नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू पर लगी हुई है.