वक्फ बोर्ड बिल पर कौन किसके साथ ? इंडिया और एनडीए के बीच घमासान तेज

वक्फ ( संशोधन) विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जा रहा है और इस पर 8 घंटे की चर्चा तय की गई है. सरकार वक्फ अधिनियम में 40 सुधार करना चाहती है, जिनमें गैर – मुस्लिमों का वक्फ बोर्ड में प्रवेश और महिलाओं की सहभागिता को बढ़ाना शामिल है. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संख्या बल साबित करने की कोशिश भी माना जा रहा है.

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 2 अप्रैल, 2025. वक्फ ( संशोधन) विधेयक 2024 आज लोकसभा में कैसे किया जा रहा है. इस पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 8 घंटे का समय निर्धारित किया है .वक्फ अधिनियम, 1995 में पहली बार संशोधन नहीं किया जा रहा है. इस कानून में 2013 में यूपीए की सरकार के समय भी संशोधन हुए थे. बिल पर बहस के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है. लोकसभा में बहस के लिए बीजेपी, कांग्रेस, जदयू और टीडीपी समेत अन्य पार्टियों ने अपने सांसदों के लिए व्हीप जारी किए हुए हैं. मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोहराया कि सरकार बिल पर चर्चा चाहती है और इस पर सभी राजनीतिक दलों को बोलने का अधिकार है. देश भी जानना चाहता है कि किस पार्टी का क्या स्टैंड है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चर्चा में शामिल नहीं होना चाहता तो ऐसा रोकने से उन्हें कोई रोक भी नहीं सकता.

जानते हैं वक्फ बोर्ड बिल पर
लोकसभा में कौन किसके साथ ? राज्यसभा का संख्या बल

वहीं, राज्यसभा में एनडीए के 115 सांसद हैं. चीन में बीजेपी के 98, जदयू के 4,टीडीपी के 2, एनसीपी के 3 और आरएलडी के 1 सांसद शामिल है . जबकि मनोनीत सांसदों की संख्या 6 हैं और उसे जोड़ देने के बाद यह संख्या बढ़कर 121 हो जाती है राज्यसभा की कुल संख्या 236 है और यहां बहुमत के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. इस लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत है. दोनों ही जगहों पर मोदी सरकार को दिक्कत नहीं आएगी लेकिन ऐसा तब होगा जब नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी मजबूती के साथ इस बिल पर सरकार के साथ डटी रहे.

क्या है विधेयक का मकसद
वक्फ ( संशोधन) विधेयक 2024 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि वर्ष 2013 में इस अधिनियम में व्यापक संशोधन किए गए थे. संशोधनों के बावजूद, यह देखा गया है कि राज्य वक्फ बोर्डो की
शक्तियों, उसके संपत्तियों के पंजीकरण और सर्वेक्षण, अतिक्रमणों को हटाने, वक्फ की परिभाषा सहित संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए अधिनियम में अभी और सुधार की जरूरत है. इसमें कहा गया है कि 2013 में अधिनियम में संशोधन न्यायमूर्ति ( सेवा निवृत्त ) राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और वक्फ और केंद्रीय वक्फ परिषद पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद किया गया था. विधेयक 2024 का एक प्रमुख उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन,सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करना है.+ क्यों खास है यह विधेयक?+ केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में करीब 40 बदलाव करना चाहती है. एक अहम बदलाव वक्फ बोर्ड में गैर — मुसलमानों का प्रवेश हो सकता है. इसका मकसद महिलाओं और अन्य मुस्लिम समुदाय की सहभागिता को बढ़ाना है. साथ ही नए बिल में बोर्ड पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जा सकता है. विधेयक पर चर्चा और उसके बाद उसे मंजूरी मिलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है.