हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट
भारत में वक्फ बोर्डों के पास 39 लाख एकड़ भूमि है, जो देश के 5 फ़ीसदी जमीन के बराबर है. अगर सुरक्षा बलों अब रेलवे की जमीन को मिला दिया जाए तो भी उनके पास इतनी जमीन नहीं है.
नई दिल्ली/ मुंबई/ कोलकाता/ हैदराबाद, 6 अप्रैल, 2025. देश में वक्फ बिल संशोधन को लेकर माहौल गरमाया हुआ है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष दो हिस्सों में बंट चुके हैं. इस मामले पर एक विशेष रिपोर्ट जारी की गई है, जो देश में मौजूद वक्फ संपत्तियों के बारे में जानकारी देती है. भारत की 39 लाख एकड़ जमीन, यानी देश के कुल 812 लाख एकड़ का 4.8 फ़ीसदी, सिर्फ वक्फ बोर्डो के अधीन है. यह जमीन भारत के सुरक्षा बलों ( 17.99 लाख एकड़ ) और रेलवे ( 12.11 लाख एकड़ ) की कुल 30 लाख एकड़ से भी ज्यादा है. इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में दी थी . वक्फ एक ऐसी संपत्ति होती है जो इस्लामी कानून के तहत धार्मिक या धर्मार्थ कार्यों के लिए दान की जाती है. एक बार वक्फ में दी गई संपत्ति को बेचना, स्थानांतरित करना या इस्तेमाल करना निषिद्ध होता है, क्योंकि यह संपत्ति अल्लाह के नाम पर सुरक्षित मानी जाती है. देश में वक्फ बोर्ड से जुड़े डेटा के मुताबिक, साल 2013 में 18 लाख एकड़ जमीन थी . उसके बाद महज 12 सालों के बाद यानी 2025 में यह आंकड़ा 39 लाख तक बढ़ गया. इसमें 21 लाख एकड़ की बढ़ोतरी देखी गई.
वक्फ संपत्तियों पर विवाद
वक्फ संपत्तियों को लेकर विवादों का मुख्य कारण है कि कैसे और किन आधारों पर उन्हें वक्फ घोषित किया गया.
सबसे बड़ा विवाद रहा है वक्फ न्यायाधिकरण को अंतिम निर्णायक अधिकार देती थी . 2025 में लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक जिसे अब उम्मीद विधेयक कहा जा रहा है, उसमें से धारा 40 खत्म कर दिया गया. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे सबसे कठोर प्रावधान करार दिया और आरोप लगाया कि इसके जरिए संपत्तियों को मनमाने तरीके से वक्फ घोषित किया गया. सरकार के मुताबिक, 8. 72 लाख वक्फ संपत्तियों में से 4.2 लाख ऐसी है जो दीर्घकालिक धार्मिक इस्तेमाल के आधार पर वक्फ घोषित की गई. इसका अर्थ है कि कोई संपत्ति, भले ही निजी हो, अगर सालों से वहां धार्मिक गतिविधि हो रही हो तो उसे वक्फ में बदला जा सकता है