शिक्षक भर्ती घोटाले में ममता सरकार को बड़ी राहत

शिक्षक भर्ती घोटाले में ममता सरकार को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर लगाई रोक

पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को बड़ी राहत दी है. ममता सरकार के लिए ये राहत इसलिए अहम है, क्योंकि सुपरन्यूमरेरी पदों की जांच से मंत्रियों और बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता था.

नई दिल्ली/ कोलकाता/ हैदराबाद, 8 अप्रैल, पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार को बड़ी राहत दी है . कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार के सुपर- न्यूमरेरी ( अतिरिक्त) पैड बनाने के फैसले की सीबीआई जांच का निर्देश दिया था . यह फैसला 8 अप्रैल, 2025 को आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई की.

पश्चिम बंगाल सरकार ने क्या दी दलील ?
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करके ” हड़बड़ी ” में फैसला लिया. सरकार का कहना था कि 25 हजार से ज्यादा नौकरियां खत्म होने से शिक्षा व्यवस्था ठप हो जाएगी और इसका छात्रों पर बुरा असर पड़ेगा . सरकार ने यह भी कहा कि सारी नियुक्तियां गलत नहीं थी और सही — गलत को अलग किया जा सकता था.

ममता सरकार को सुप्रीम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने पहले 7 मई, 2024 को हाई कोर्ट के रद्द करने के आदेश पर रोक लगाई थी और सीबीआई को जांच जारी रखने की इजाजत दी थी, लेकिन किसी के खिलाफ सख्त कदम ना उठाने को कहा था . अब ताजा फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि सुपरन्यूमरेरी पदों के मामले में सीबीआई की जांच नहीं होगी. हालांकि,भर्ती में हुई गड़बड़ियों की जांच चलती रहेगी.

जानें क्या है पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत 2016 में हुई, जब पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन ने 25 हजार 753 शिक्षकों और गैर — शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की थी. बाद में इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे थे .
कोलकाता हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल, 2024 को पूरी भर्ती को ” अमान्य और शून्य” करार देते हुए रद्द कर दिया था. हाई कोर्ट ने इसके लिए सीबीआई को जांच करनी चाहिए भी कहा था .