हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग को पिछले कुछ सालों में जोरदार ढंग से उठाया है.
नई दिल्ली / हैदराबाद, 4 मई, 2025. नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा जाति जनगणना कराए जाने के ऐलान को कांग्रेस अपनी बड़ी जीत बता रही है. इसे लेकर पार्टी ने कांग्रेस कार्य समिति की एक अहम बैठक बुलाई थी.
बताना होगा कि कांग्रेस लंबे वक्त से जाति जनगणना कराए जाने की मांग कर रही थी. अब जब मोदी सरकार ने इसका ऐलान कर दिया है तो यह देखना जरूरी होगा कि पार्टी आगे का रास्ता कैसे तय करेगी ? कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वह जाति जनगणना कराए जाने की टाइमलाइन, बजट और आरक्षण को लेकर 50% की सीमा के बारे में भी मोदी सरकार से जवाब चाहती है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग को पिछले कुछ सालों में जोरदार ढंग से उठाया है. केंद्र सरकार के फैसले के बाद राहुल गांधी ने कहा कि अगला कदम आरक्षण की 50% की सीमा को हटाना और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को लागू करना होना चाहिए.
हम टाइमलाइन चाहते हैं– राहुल गांधी
राहुल गांधी ने केंद्र के फैसले के बाद कहा, ” ऐसा क्या हुआ कि नरेंद्र मोदी, जो कहते थे कि सिर्फ चार जातियां हैं, उन्होंने जाति जनगणना की घोषणा कर दी . हम इसका समर्थन करते हैं लेकिन हम टाइमलाइन चाहते हैं कि यह कब होगी. तेलंगाना जाति जनगणना के लिए एक मॉडल बन गया है. ” कांग्रेस लोगों को बताना चाहती है कि उसके दबाव के कारण ही सरकार ने इस मांग को स्वीकार किया है.
कांग्रेस का सामाजिक न्याय का एजेंडा
जाति जनगणना की मांग कांग्रेस के सामाजिक न्याय के एजेंडे का अहम बिंदु रही है और इसके जरिए पार्टी देश में सबसे बड़ी आबादी वाले ओबीसी वर्ग तक पहुंचाना चाहती है. मंडल आंदोलन के बाद के सालों में ओबीसी वर्ग कांग्रेस से छिटक गया और मोदी सरकार के दौर में वह बीजेपी के साथ जुड़ता दिखाई दिया है.
जब भाजपा के नेता नहीं बोलते थे, तब भी हम जाति जनगणना का मुद्दा उठाते थे…,
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने क्या कहा ?

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जाति व्यवस्था सदियों पुरानी है और इसके आधार पर भेदभाव हमारे समाज की सच्चाई है
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा जाति जनगणना कराए जाने के फैसले के बाद देश की सियासत का माहौल जबरदस्त गर्म है. न सिर्फ विपक्षी दलों ने बल्कि मोदी सरकार की अगुवाई कर रहे एनडीए में भी कई दल ऐसे हैं जो जाति जनगणना कराए जाने की मांग करते रहे हैं . ऐसा ही एक दल ” अपना दल “( सोनेलाल ) है. अपना दल ( सोनेलाल ) उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रमुख सहयोगी दल है और इसका तर्क है कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए जाति जनगणना जरूरी है. पार्टी की अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस मामले में पत्रकारों से बातचीत की और कहा, क्यों जरूरी है जाति जनगणना? उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था सदियों पुरानी है और इसके आधार पर भेदभाव हमारे समाज की सच्चाई है. अगर आप चाहते हैं कि देश आगे बढ़े तो हमें सामाजिक असमानताओं को दूर करना होगा और इसके लिए जाति जनगणना आवश्यक है . अनुप्रिया पटेल ने कहा कि इससे हमें पता चलेगा कि समाज में किस हद तक जाति का वजूद है. पटेल ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जातियों में बहुत सी जाति और समुदाय हैं जिन्हें अभी तक मानता नहीं मिली . पटेल ने कहा कि ओबीसी हमारी आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा है और गिनती होने पर ही इनकी संख्या के बारे में पता चलेगा. अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हमें नए आंकड़ों की जरूरत है और अपडेटेड आंकड़ों के आधार पर हमारी नीतियां ज्यादा बेहतर होगी. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस और यूपीए लंबे समय तक सत्ता में रहे, तब उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चार बार यूपी की सत्ता में रही, लालू प्रसाद यादव ने बिहार में सरकार चलाई और वह यूपीए सरकार का हिस्सा थे और ऐसा कर सकते थे. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केवल एक मौका मिला. अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हम यह नहीं चाहते कि यूपीए की सरकार के दौरान जो गड़बड़ियां हुई, वे हों. उन्होंने कहा, ” हम जाति जनगणना करने में 6 दशक नहीं लगाएंगे .