केरल के कोझिकोड में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन संपन्न

भारतीय समाजवादी आंदोलन के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात. आईएसआईएएफ सहित भारतीय समाजवादी बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं का समन्वय करेगा और समाजवादी लेखकों, कलाकारों और अन्य रचनात्मक बुद्धिजीवियों, शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों एवं विभिन्न क्षेत्रों के समाजवादी कार्यकर्ताओं का एक इंद्रधनुषी संगठन तैयार करेगा.

कोझिकोड / हैदराबाद . पिछले दिनों केरल के कोझिकोड में तीन दिवसीय अखिल भारतीय समाजवादी सम्मेलन आयोजित की गई जिसमें भारतीय समाजवादी आंदोलन के अगले चरण की आधारशिला रखी गई . सम्मेलन में भारतीय समाजवादी आंदोलन के दूसरे चरण के मिशन के पहले कदम के रूप में
” भारतीय समाजवादी बुद्धिजीवी एवं कार्यकर्ता मंच ( आईएसआई एएफ )” के गठन का संकल्प लिया गया तथा भारतीय समाजवादी आंदोलन को पुनर्जीवित करने का भी संकल्प लिया गया . इसके लिए दीर्घकालिक योजनाओं और रणनीतियों की आवश्यकता थी . इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए, ( मौजूदा समाजवादी संगठ नों और मंचों के साथ) विभिन्न प्रकार के संगठन और मंच बनाए जाने हैं. एक और समर्पित समाजवादियों का एक मुख्य संगठन बनाना होगा वहीं दूसरी ओर एक बहुत उदार संगठन बनाना होगा जो समाजवादी पार्टी और आरजेडी जैसे राजनीतिक दलों को भी समायोजित कर सके . इन दो चरम सीमाओं के बीच विभिन्न प्रकार के संगठन और विभिन मंडल और कक्षाएं बनाई जानी है . जहां विभिन्न प्रकार और रंगों के भारतीय समाजवादी समूह और संगठन इस परियोजना का हिस्सा होगा. भारत में क्रांतिकारी आंदोलनों की अहिंसक धारा की विरासत को भारतीय समाजवादी कार्यकर्ताओं द्वारा बनाए रखा जा रहा है. इसके लिए आईएसआईएएफ भारतीय समाजवादी आंदोलन के दूसरे चरण के प्रमुख संगठन या सुविधाकर्ता के रूप में कार्य करेगा. इसी कारण भारतीय समाजवादी आंदोलन के प्रथम चरण के योगदान और तत्कालीन सोशलिस्ट पार्टी के सामाजिक- आर्थिक कार्यक्रमों की आज भी खूब सराहना हो रही है. भारतीय समाजवादी बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय समाजवादी आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है. भारतीय समाजवादी बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं को 21वीं सदी के समाजवाद के क्षितिज को उजागर करना होगा और भारतीय गणराज्य Phle आरएसएस और भाजपा परिवार के चंगुल से एवं नव साम्राज्यवादी और पूंजीवादी ताकतों से बचना होगा. इसलिए ” भारतीय समाजवादी बुद्धिजीवी एवं कार्यकर्ता मंच “( आईएसआईएएफ ) के गठन का विचार ऐतिहासिक और अनिवार्य है . कोझिकोड में आयोजित राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रो. आनंद कुमार ( दिल्ली), डॉ संजय मंगल गोपाल ( मुंबई), विजय कुमार रंगास्वामी ( कर्नाटक) और डॉ. एसपी उदय कुमार ( तमिलनाडु ) को संयोजक और रेजिनार्क. पी ( केरल ) को आईएसआईएएफ का समन्वयक बनाने का संकल्प लिया . इस समिति में शामिल थे राजेश रामकृष्णन ( चेन्नई, तमिलनाडु ), डॉ अंबिका, सतीश व प्रो. राजाराम थोलापाडी ( कर्नाटक ), टी. गोपाल सिंह व डॉ. जी सत्यनारायण( हैदराबाद, तेलंगाना), बानी मंजरी दास और प्रफुल्ल सामंतरा ( ओड़िशा ), मंथन ( झारखंड), अजय खरे व स्वरूप नायक ( मध्य प्रदेश ), डॉ दीपक मिश्रा
( लखनऊ, उत्तर प्रदेश), अधिवक्ता साधना शिंदे, अश्विनी सातव, अधिवक्ता विद्या नाइक, प्रफुल्ल म्हात्रे ( महाराष्ट्र), नारायण देसाई ( गोवा), डॉ. के श्रीकुमार, विजय राघवन चेलिया, अधिवक्ता ई. रविंद्रनाथ व विनोद पय्यादा ( केरल) हालांकि यह सूची पूरी नहीं है, इस समिति में और सदस्य शामिल किए जाएंगे. बैठक में आगामी दिनों में पांच महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभियान की घोषणा करने का भी संकल्प लिया गया . 1- जुलाई 2 – युसूफ मेहरअली की 75 वीं पुण्यतिथि पर भारत बचाओ अभियान शुरू होगा( भारतीय राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता के प्रश्न पर ) 2- 4 दिसंबर- दादा भाई नौरोजी की 200 वीं जयंती पर पूंजीवाद के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा. 3- 2 से 12 अक्टूबर- गांधी, जेपी, लोहिया दिवस- अहिंसा और विकेंद्रीकरण के लिए अभियान. 4- 28 नवंबर( महात्मा फुले स्मृति दिवस) से 6 दिसंबर तक डॉ बाबासाहेब अंबेडकर स्मृति दिवस) जाति व्यवस्था के विरुद्ध अभियान और जाति व्यवस्था उन्मूलन सम्मेलन . 5- 26 दिसंबर– मामा बालेश्वर दयाल स्मृति दिवस — आदिवासी और मूल निवासी लोगों के अधिकार पर कन्वेंशन. केरल के कोझिकोड में आयोजित राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में लगभग 500 लोगों ने शिरकत की. जहां पूरे भारत से आयोजित दो दिवसीय प्रतिनिधि बैठक में 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सामाजिक, आर्थिक मुद्दे, भारतीय समाजवादी आंदोलन का अगला चरण और 21वीं सदी के समाजवाद की विचारधारा पर चर्चा की गई. भारतीय समाजवादी आंदोलन की 90 वीं वर्षगांठ और अंतिम समाजवादी क्रांति की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर केरल के कोझिकोड में पार्टी सम्मेलन के दौरान स्मारिका की मलयालम डमी कॉपी बानी मंजरी दास द्वारा सार्वजनिक तौर पर जारी की गई
वहीं, स्मारिका की मूल और पूर्ण प्रति, ( जिसमें राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की रिपोर्ट भी शामिल होगी) जून 2025 में कोझिकोड में आपातकाल घोषणा की 50 वीं वर्षगांठ पर प्रकाशित की जाएगी. जानकारी के मुताबिक, स्मारिका को केरल और भारत में समाजवादी आंदोलन के ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसके लिए डॉ महेश मंगलात को स्मारिका समिति के अध्यक्ष एवं विजय राघवन चेलिया ( संपादक), डॉ. के श्री कुमार, पीके राजन मास्टर, के राजीव कुमार और के रुओसी को स्मारिका के संपादकीय बोर्ड में रखा गया है. केरल के कोझिकोड स्थित केपी मोहम्मद नगर में राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन का उद्घाटन विशिष्ट समाजवादी नेता एम वी श्रेयम्स कुमार ने किया.