सीजफायर को लेकर बीजेपी,कांग्रेस और दूसरे दलों की क्या राय है?

पाकिस्तान के साथ हुई सीजफायर को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और दूसरे दलों की क्या राय है ?

प्रदत्त जानकारी के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम पर राजनीतिक सहमति के साथ असहमति भी साफ तौर पर दिखी. भाजपा जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और विदेशी हस्तक्षेप पर चिंता जाता रहे हैं.

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 11 मई, 2025. भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में घोषित संघर्ष विराम का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. जहां केंद्र सरकार और बीजेपी ने इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया, वहीं कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर सवाल भी उठाए और प्रधानमंत्री से खुली चर्चा की मांग की. भाजपा और एनडीए ने संघर्ष विराम का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की . जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे भारत की ” जीत” करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने आतंकवादियों और उनके मददगारों को करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा, ” पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस दृढता से जवाब दिया, उससे पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है. हमारे जवानों की बहादुरी
ने दुश्मनों को घुटनों पर ला दिया है. ” एनडीए के सहयोगी दल जेडीयू ने भी इसका समर्थन किया. पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, ” भारत ने पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया है जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा. “

संघर्ष विराम की ऐलान पर कई सवाल खड़े किए
कांग्रेस ने भी आतंक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को पूरा समर्थन दिया, लेकिन संघर्ष विराम के एलान पर कई सवाल खड़े किए . पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि 2019 में पुलगामा और बालाकोट के वक्त की तरह, इस बार भी अमेरिका की भूमिका ने हालात शांत किए. उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान को उद्दृत करते हुए कहा, ” इसमें कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान ने तटस्थ स्थल पर बातचीत पर सहमति जताई है. यह द्विपक्षीयता की नीति से हटने जैसा है जो शिमला समझौता का हिस्सा थी. ” कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी संघर्ष विराम के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, ” हम युद्ध विराम को लेकर जल्दबाजी में तो नहीं आ गए? क्या पाकिस्तान ने वाकई कोई सबक सीखा या फिर भविष्य में ऐसी हरकत दोहराएगा? “
कांग्रेस की एक और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा, भारत कभी दीर्घकालिक युद्ध नहीं चाहता था, हमने आतंकियों को सबक सिखा दिया है. लेकिन यह देखना जरूरी है कि आगे क्या होता है. ” पार्टी संचार प्रमुख जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से सर बताइए बैठक बुलाने और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की. उन्होंने कहा, ” पहलगाम आतंकी हमले और संघर्ष विराम जैसे गंभीर मुद्दों पर पूरे देश को एक साथ आना चाहिए. ” जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शांति और संप्रभुता को समान रूप से महत्वपूर्ण बताया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि आतंक के खिलाफ सरकार की हर कार्रवाई में वह साथ हैं. दूसरी तरफ राजद नेता तेजस्वी यादव ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की और प्रधानमंत्री से संघर्ष विराम की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से देने को कहा. राज्यसभा सांसद मनोज झा ने यहां तक कह दिया कि अगर यह फैसला अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका में लिया गया है तो यह चिंताजनक है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दो टूक कहा, ” जब तक पाकिस्तान अपने क्षेत्र का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए करता रहेगा, तब तक स्थाई शांति संभव नहीं है. ” उन्होंने सरकार के साथ खड़े रहने का भरोसा जताया. लेकिन यह भी कहा कि संघर्ष विराम की घोषणा प्रधानमंत्री को करनी चाहिए थी, किसी विदेशी नेता को नहीं.