बिहार चुनाव से पहले वक्फ कानून का विरोध

बिहार में 6 महीने के अंदर विधानसभा के चुनाव होने हैं. वक्फ कानून के विरोध के चलते क्या चुनाव में बीजेपी, जेडीयू, लोजपा और हम ( सेकुलर) को नुकसान होगा ?

नई दिल्ली/ पटना/ हैदराबाद, 22 मई, 2025. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देशभर में वक्फ बचाओ अभियान के तहत कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है लेकिन बिहार में विशेषकर बोर्ड ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है. बोर्ड ने पटना, अररिया, किशनगंज, भागलपुर, बेगूसराय, सहरसा, मधुबनी, सिवान और दरभंगा जिलों में वक्फ कानून के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किए हैं. हाल ही में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि ऐसी संभावना है कि वक्फ बचाओ अभियान के ये कार्यक्रम चुनाव नतीजों पर असर डाल सकते हैं. बिहार में 6 महीने के अंदर विधानसभा के चुनाव होने हैं . 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में 9 जिलों पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फोकस किया है. इन नौ जिलों में 72 विधानसभा सीटें हैं और इनमें 30 सीटों पर मुस्लिम समुदाय ताकतवर है. बिहार में मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 17. 7% है.

ये है 72 सीटों का गणित
2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को इन 72 में से 38 सीटों पर जीत मिली थी. इनमें से बीजेपी ने 25, जेडीयू ने 11, और उस गठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी ने 2 सीटें जीती थी जबकि विपक्षी महागठबंधन को 28 सीटों पर जीत मिली थी. महागठबंधन में शामिल आरजेडी ने 11, कांग्रेस 4, सीपीआई ( एमएल )4, और भाकपा ने 2 सीटें जीती थी . 2020 के चुनाव नतीजों का अगर विश्लेषण करें तो इन 72 सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन काफी बेहतर था क्योंकि मुस्लिम समुदाय को बिहार में राजद का मजबूत समर्थक माना जाता है. एक जरूरी बात यह भी है कि इन 72 सीटों में से 5 सीटें एआइएमआइएम ने भी जीती थी. जो बाद में 4 विधायक राजद के साथ चले गए थे. वहीं, चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी ने उस वक्त एनडीए से अलग जाकर चुनाव लड़ा था और उसे भी यहां 1 सीट पर जीत मिली थी .

बीजेपी और सहयोगी दल है निशाने पर

वक्फ बचाओ अभियान के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम समुदाय के अन्य संगठन बीजेपी और इसके सहयोगी दलों पर हमला बोल रहे हैं. ऐसे दलों में जेडीयू भी शामिल है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि इन दलों ने वक्फ कानून के मामले में मुस्लिम समुदाय के साथ धोखाधड़ी की है . बीते महीने दिल्ली में वक्फ कानून के विरोध में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था. इस कार्यक्रम में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आरोप लगाया था कि एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों ने संसद में वक्फ कानून का समर्थन करके मुसलमान की पीठ में खंजर घोंपा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बीजेपी के सहयोगी दलों पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वे वक्फ कानून के मामले में सरकार से अपना समर्थन या तो वापस ले या फिर मुस्लिम समुदाय का विरोध झेलने के लिए तैयार रहें .

मुस्लिम समुदाय के वोट नहीं मिलेंगे ?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने खुलकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ( सेकुलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का नाम लिया था . ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि जेडीयू, लोजपा, और हम पार्टी को मुस्लिम समुदाय के वोट मिलते रहे हैं लेकिन इस बार उन्हें ऐसा समर्थन नहीं मिलेगा . हालांकि, बोर्ड का कहना है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के खिलाफ सीधे तौर पर कोई राजनीतिक अपील नहीं करेगा.

गुमराह करने की कोशिश– बीजेपी

बीजेपी का कहना है कि वक्फ कानून के मामले में विपक्ष और कुछ संगठन मुसलमान को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले महीने बीजेपी के नेतृत्व ने चार सदस्यों की कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाई थी. कमेटी को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह देश भर में जाकर मुस्लिम समुदाय के साथ ही अन्य लोगों के बीच उन्हें वक्फ कानून को लेकर जागरूक करें. इसके तहत भागलपुर, पटना, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में बैठक भी हुई थी.

कांग्रेस वक्फ कानून को बनाएगी चुनावी मुद्दा
पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय विशेषकर पसमांदा मुसलमानों ने पहले जेडीयू, लोजपा और हम पार्टी को वोट दिया लेकिन अब वे वक्फ कानून पर नाराजगी के चलते इन पार्टियों को वोट नहीं देंगे. उन्होंने बताया कि कांग्रेस बिहार चुनाव में वक्फ कानून को चुनावी मुद्दा बनाएगी.

जदयू को होगा नुकसान ?
जदयू के नेताओं के मुताबिक, उन्हें डर है कि वक्फ कानून के मुद्दे पर पार्टी को नुकसान हो सकता है. इस साल मार्च में इमारत– ए — शरिया ने सीएम नीतीश कुमार की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया था. नीतीश कुमार और चिराग पासवान द्वारा आयोजित इफ्तार और ईद मिलन जैसे कार्यक्रमों से जमीयत उलेमा — ए — हिंद ने दूरी बना ली थी.