बिहार के वोटर्स के साथ धोखाधड़ी

राहुल गांधी, तेजस्वी यादव सहित तमाम विपक्षी नेता बिहार से लेकर दिल्ली तक एसआईआर का विरोध कर रहे हैं.

नई दिल्ली/ पटना/ हैदराबाद, 27 जुलाई, 2025. बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन ( एसआईआर ) को लेकर अच्छा — खासा विवाद राज्य की विधानसभा से लेकर देश की संसद तक में हो रहा है. विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की इस एक्सरसाइज को समाज के गरीब लोगों के वोट काटने की साजिश बताया है. इस मामले में 28 जुलाई यानि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. सुनवाई से पहले गैर सरकारी संगठन एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. यह जवाब चुनाव आयोग के हलफनामे के काउंटर में दिया गया है. एडीआर ने कहा है कि बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की एक्सरसाइज राज्य के मतदाताओं के साथ बहुत बड़ी धोखाधडी है. एडीआर ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में किया गया दावा कि उसे वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान मतदाताओं की नागरिकता का वेरिफिकेशन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, यह दावा अदालत के पुराने फसलों के खिलाफ है. बताना होगा कि एसआईआर के खिलाफ कई राजनीतिक दलों के नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और एडीआर ने भी इसके विरोध में अदालत में याचिका दायर की थी.

एडीआर ने क्या कहा ?
एडीआर ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों — लाल बाबू हुसैन बनाम भारत संघ( 1995) और इंद्रजीत बरुआ बनाम ईसीआई ( 1985) का हवाला दिया है. इंद्रजीत बरुआ बनाम ईसीआई ( 1985 ) के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वोटर लिस्ट में नाम होना नागरिकता का सबूत है और इसे खारिज करने की स्थिति बनती है तो ये जिम्मेदारी आपत्ति करने वाले की है. चुनाव आयोग ने कहा था कि मतगणना फॉर्म के साथ ही 2003 के बाद वोटर लिस्ट में जोड़े गए मतदाताओं को उसके द्वारा जारी किए गए 11 डॉक्यूमेंट्स में से कोई एक देना होगा जो उनकी नागरिकता को साबित करता हो . एडीआर ने कहा कि इस वजह से 2003 के बाद वोटर लिस्ट में शामिल हुए मतदाताओं पर उम्र और नागरिकता को साबित करने की जिम्मेदारी आ गई है.

आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड का मामला
बताना होगा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और राशन कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के तौर पर नहीं माना जाएगा और उसने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के भी सुझाव को स्वीकार नहीं किया. आयोग का कहना था कि आधार कार्ड, राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड धोखाधड़ी या गलत डॉक्यूमेंट पेश करके बनाए जा सकते हैं. इसे लेकर एडीआर ने कहा है कि आयोग के द्वारा मांगे गए11 दस्तावेज भी फर्जी या झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बनाए जा सकते हैं.

ईआरओएस को मिली असीमित ताकत
एडीआर ने कहा है कि बिहार से जो ग्राउंड रिपोर्ट्स मिल रही है, उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से दिए गए दिशा निर्देशों का बूथ लेवल अफसर बीएलओ द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है. एडीआर के मुताबिक, मतगणना फार्म की जांच या डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है और इससे ईआरओएस को बेहिसाब ताकत मिल गई है.

‘ चुनाव आयोग को कुछ नहीं पता, हम पर थोप दिया…’

65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर
बताना होगा कि एसआईआर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है और इसमें बिहार के करीब 8% मतदाता यानी 65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं. अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या ये लोग चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे? चुनाव आयोग ने कहा कि 7.23 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म मिले हैं जिन्हें मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची में शामिल किया जाएगा. चुनाव आयोग 1 अगस्त को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित करेगा और 30 सितंबर को इसका फाइनल प्रकाशन किया जाएगा . ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होने के बाद और भी नाम हटाए जा सकते हैं क्योंकि फाइनल लिस्ट जारी होने से पहले 7.23 करोड़ मतदाताओं द्वारा आयोग को दिए गए डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाएगी. वहीं, जब की लिस्ट से बाहर रह गए लोगों को 1 अगस्त से 1 सितंबर के बीच दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा.’