बीजेडी नेताओं की बैठक ने बढाई सियासी सरगर्मी


हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट

ओड़िशा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जाजपुर जिले के ओलासुनी गुफा में बीजेडी के दिग्गज नेताओं का एक गुप्त जमावड़ा हुआ है जिससे नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा जोरों पर है. प्रभात त्रिपाठी की मेजबानी में अमर सतपथी, सौम्य रंजन पटनायक समेत कई नेता शामिल हुए. यह बैठक बीजेडी और बीजेपी को चुनौती देने वाले मोर्चे की तैयारी मानी जा रही है.

भुवनेश्वर/ हैदराबाद, 22 अगस्त, 2025. ओड़िशा की सियासत में एक बार फिर नई हलचल शुरू हो गई है. बीजेडी के दिग्गज नेताओं का जाजपुर जिले के ओलासुनी गुफा में हुआ गुप्त जमावड़ा अब नए राजनीतिक समीकरण की आहट दे रहा है. माना जा रहा है कि यह गुप्त मुलाकात बीजेडी और बीजेपी के वर्चस्व को चुनौती देने वाले नए मोर्चे की तैयारी का हिस्सा हो सकता है. राज्य के वरिष्ठ बीजेडी नेता प्रभात त्रिपाठी की मेजबानी में आयोजित इस बैठक में अमर सतपथी, सौम्य रंजन पटनायक, प्रसन्न पाटसानी, रवि नारायण पाणी और रामचंद्र हंसदा जैसे बड़े नाम शामिल रहे. इसके साथ ही युवा चेहरों में भद्रक से असित पटनायक और केंद्रपाड़ा से रवि सामल भी मौजूद थे. ओलासुनी गुफा, जिसे कभी बीजेडी का मजबूत गढ़ माना जाता था, अब सियासी चर्चाओं का नया केंद्र बन गया है. यह बैठक ऐसे वक्त में हुई है जब बीजेडी के भीतर असंतोष की आवाजें तेज हो रही है. सूत्र बताते हैं कि पार्टी पर वी के पांडियन की मजबूत पकड़ और वरिष्ठ बीजेडी नेताओं अनदेखी असंतोष की बड़ी वजह है . इधर, पार्टी सुप्रीमो नवीन पटनायक की सेहत को लेकर लगातार उठ रहे सवाल और अंदरूनी खींचतान ने इन अटकलें को और हवा दे दी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि असंतुष्ट नेताओं का यह जमावड़ा एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच की नींव हो सकता है, जिसकी कमान प्रभात त्रिपाठी और अमर सतपथी जैसे नेताओं के हाथ में हो सकती है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राज्य की कुछ प्रभावशाली हस्तियां पर्दे के पीछे इस संभावित मोर्चे को समर्थन दे रही है. हालांकि, अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, मगर इस मुलाकात को ओड़िशा राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है.

खंडपाड़ा के पूर्व विधायक सौम्य रंजन पटनायक ने उठाए तीखे सवाल

पूर्व विधायक ने कहा कि अगर कोई क्षेत्रीय दल अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा रहा है, तो विकल्प तलाशेंगे ही. जब जो दल खुद को क्षेत्रीय कहते हैं, वे ओड़िशा के हित में आवाज तक नहीं उठा रहे और सत्ता पक्ष का विरोध करने से भी बच रहे हैं, ऐसे में फिर लोग किस ओर देखेंगे ? “