पश्चिम बंगाल, असम और ओड़िशा में कोला बऊ स्नान के साथ दुर्गा पूजा

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा का विशेष आयोजन शुरू हुआ, जिसमें कोला बऊ स्नान की परंपरा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया.

कोलकाता/गुवाहाटी/ भुवनेश्वर / हैदराबाद,29 सितंबर 2025. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा का विशेष आयोजन शुरू हुआ, जिसमें कोला बऊ स्नान की परंपरा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. दुर्गा पूजा का त्योहार लगभग 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पांच मुख्य दिन, महाषष्ठी, महासप्तमी, महा अष्टमी, महानवमी और विजयदशमी, महत्व रखते हैं. महासप्तमी को सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में’ कोला बऊ ‘( केले का पौधा) को स्नान कराया जाता है. यह दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें एक केले के पौधे को लाल धोती और सिंदूर पहनाकर दुल्हन की तरह सजाया जाता है और गंगा नदी या किसी अन्य जलाशय में स्नान कराया जाता है. इस बीच सोमवार को गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी के तट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. यहां से नदियों के पवित्र जल से भरे मिट्टी के कुल्हड़ मंदिरों में ले गए. इसके तमाम मंदिरों और पंडालों में मां दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा अर्चना और आह्वान किया गया. इससे पहले ‘ कोला बऊ ‘ नव पत्रिका ( नौ पौधों) के हिस्से के रूप में मां दुर्गा पूजा पंडाल में गणेश के बगल में स्थापित की गई. मंत्रोचार और ढाक की थाप के बीच भक्तों ने मां की आराधना की. कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्तिमय भजनों का आयोजन हुआ. हिंदू मान्यता के मुताबिक, इस दिन माता की पूजा अर्चना करने से साधक के जीवन से जुड़ी सभी प्रकार की बधाएं दूर हो जाती है. इस अनुष्ठान को मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और ओड़िशा जैसे राज्यों में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह उत्सव न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और संस्कृति की एकता का भी प्रतीक है. भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का खूब माहौल देखने को मिला.