झटकों का सिलसिला : लेह – लद्दाख से बिहार तक

इस चुनावी हलचल ने मीडिया और जनता की नींद उड़ा दी है. लेह – लद्दाख में ‘ जेन – जी ‘ हिंसा, H1B वीजा शुल्क और बिहार चुनावी हलचल ने भारत में युवा, मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की नई बहस छेड़ दी है.

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 29 सितंबर 2025. एक चैनल ने दिल को समझाया कि ‘ जेन – जी ‘ का कोई ‘ लेवल ‘
नहीं, लेकिन लेह लद्दाख के एक व्यक्ति की पुकार सुनकर युवा आए.’ जेन – जी ‘ का हिंसक प्रदर्शन… पत्थरबाजी और आगजनी… गोली चली… 4 की मौत… कर्फ्यू… फिर गिरफ्तारियां. चैनलों में आ जुटे एकवचन, बहुवचन, कटु वचन, तिक्तवचन… अपनी – अपनी रोटी सेंकने. एकवचन: सरकार क्या सो रही थी… सरकार जिम्मेदार..! दूसरा वचन : सब कुछ असली मुद्दों से भटकाने के लिए कराया गया! तीसरा वचन : ‘ जेन – जी ‘ को उकसाया गया… और युवा आंदोलन करने लगे! चौथा वचन: ये तो नमूना है, असली तो आना है! पांचवा वचन :’ विदेशी फाउंडेशनों ‘ से इतने – कितने डॉलर आए… इतना ‘ विदेशी धन’ आया और उसने अपना गुल खिलाया..! सवाल उठा कि इसके पीछे किसका हाथ है, तो जवाब आए कि युवा बेरोजगार पूर्ण राज्य का दर्जा मांगते हैं… सीमावर्ती इलाके पर चीन की नजर है… इतनी जल्दी कैसे दें सरकार राज्य का दर्जा! यों इलाके के विकास के लिए बहुत सी इमदाद दी गई है! एक चैनल कहिन वे भारत मे अराजकता फैलाना चाहते हैं… एक चैनल बताए कि नेपाल का सीधे नजर आया तार, कई नेपाली गिरफ्तार! एक कहिन कि हमारे नेता ने तो पहले ही संविधान बचाने के लिए’ जेन – जी ‘ का आह्वान कर दिया था! फिर एक कहिन कि हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव ने जवाब दे दिया. फिर आया अपने ‘ अंकल जी’ का एक बड़ा झटका कि अब से एच 1 बी वीजा की फीस एक लाख डॉलर! और अमेरिका के सपने देखने वाला अपना मध्य वर्ग देर तक निराशा के झटके में झूलता रहा. दृश्य भी विचित्र… अंकल कहें कुछ, सचिव कहें कुछ..! इसे देखकर ‘ सिलिकॉन वैली ‘ की कुछ शीर्ष तकनीक कंपनियों के भारत– मूल के मालिकों या निर्देशकों ने प्रार्थना की कि ऐसे जुल्म ना करें महाराज, नहीं तो आपके अमेरिका को फिर से महान ‘ बनाने वाली ये कंपनियां ही बैठ जाएगी… याद रखें’ प्रभु जी! तुम वीजा हम घीसा! तुम्हारे नए शुल्कों ने हमको धर -धर करके पीसा!’ कहते हैं कि तब कहीं जाकर’ अंकल जी’ पसीजे और कहा कि जिनके पास पहले से ‘ एच 1बी वीजा ‘ है, उनको ये फीस नहीं देनी. सिर्फ नए लोगों को देनी होगी. तब जाकर मध्य वर्ग की सांस में सांस आई. इसे कहते हैं कि पहले झटका, फिर कुछ देर झटके को झटका, फिर अंत में सबने सटका..! अब बिहार का दृश्य : पहले आई एक ‘ पारिवारिक कलह कथा ‘… निस्वार्थ बलिदान की कथा… फिर आई जयचंद कथा… फिर आया सवाल इस परिवार का ‘ जयचंद कौन ‘! फिर आया एक शाम प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय के नाम लघु संबोधन! घोषित नई ‘ जीएसटी’ के सुधारो की घोषणा, यानी उत्सव भी मौसम में देश की जनता को ढ़ेर सारी बचत की सौगात! सभी चीजें सस्ती… रोजमर्रा के खानपान की चीजों पर जीएसटी शून्य, सिर्फ दो ‘ श्रेणी ‘– एक पांच फ़ीसद वाली और दूसरी 18 फीसद वाली! भारत में बनी चीजों के उपयोग का आह्वान… आत्मनिर्भर बनने का संदेश! विपक्ष भी नाखुश… कि ये तो हमारा ही विचार था… कि अगर करना था तो पहले क्यों नहीं किया… कि ये बढे शुल्कों के कारण किया… कि यह बिहार के चुनावों के लिए किया गया..! और फिर आई बिहार में आयोजित एक बड़े विपक्षी दल की बड़ी बैठक और बिहार चुनाव के लिए अपेक्षित तैयारियों व महागठबंधन के दलों के सीट बंटवारे की खबरें..! यहीं कहीं से निकली एक खबर, जो कहती थी कि यह आजादी की दूसरी लड़ाई..! एक चर्चक बोला कि भइए इनमें से किसी ने लड़ी है आजादी की लड़ाई? सच! इन दिनों निंदकों की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है..! अरे भाई इन्होंने ना लड़ी, उनके पुरखों ने तो लड़ी..! इस बीच एक नया शब्द आया’ नेपोकिड ‘( भाई – भतीजे), लेकिन इन दिनों तो ‘ नेपोकिड ‘ होना भी गर्व का विषय बताया जाने लगा है कि ‘ नेपोकिड ‘ भी चुनकर आते हैं..! इसके बाद आए ‘ गरबा उत्सव’ के नए ‘ प्रवेश नियम’ कि हिंदुओं का त्योहार… केवल हिंदुओं को इजाजत है… जो तिलक लगा कर आएं… पहचान पत्र… आधार कार्ड आदि साथ लाएं..! इस पर भी कुछ देर हाय – हाय..!