कैसे माने चिराग पासवान ?

1996 में गठबंधन के बाद यह पहली बार है जब भाजपा और जेडीयू विधानसभा चुनाव में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे

नई दिल्ली/ हैदराबाद, 13 अक्टूबर, 2025. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीट बंटवारा हो चुका है. भाजपा और जेडीयू 101– 101 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हुए हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पुष्टि किए गए इस समझौते के तहत चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी ( रावि ) को 29 सीटें दी गई है, जबकि जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ( सेक्युलर ) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा( आरएलएम )6—6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

1996 के बाद पहली बार भाजपा और जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ रहे चुनाव


1996 में गठबंधन के बाद पहली बार है जब भाजपा और जेडीयू विधानसभा चुनाव में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. 2020 में जेडीयू ने 122 सीटों पर और भाजपा 121 सीटों पर चुनाव लड़ा था. जेडीयू ने अपने हिस्से में से हम को 7 सीटें दीं और भाजपा ने मुकेश सहनी कि विकासशील इंसान पार्टी( वीआईपी ) को अपने हिस्से में से 11 सीटें दी थी. इस बार लोजपा ( रावि ) और हम पार्टी ने अधिक हिस्सेदारी के लिए जोरदार दबाव बनाया था. चिराग पासवान की पार्टी शुरुआत में 40 और फिर 35 सीटों के लिए जोर लगाया, वहीं जीतन राम मांझी ने 15 सीटों की मांग की. एनडीए सूत्रों ने बताया कि गठबंधन ने शुरू में लोजपा (रा वि ) को 20 से 25 सीटों तक सीमित रखने की मांग की थी, लेकिन बाद में बढ़ानी पड़ी. अंतिम निर्णय दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली, बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए.

चिराग को कैसे मनाया ?
चिराग की पार्टी की मांग बातचीत में एक बडी अड़चन थी. 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन ने जहां अपनी लड़ी हुई पांच सीटों पर जीत हासिल की और कुल वोट शेयर का 6% से ज्यादा हासिल किया, उसे सौदेबाजी की ताकत दी. हालांकि, भाजपा के लिए सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने ये सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के कारण जीती, न कि अपनी राजनीतिक ताकत के कारण. पार्टी विभाजन से 1 साल पहले 2020 में लोजपा ने बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 135 पर चुनाव लड़ा था, जिसकी भारी कीमत एनडीए को चुकानी पड़ी थी . 64 विधानसभा सीटों पर जहां पार्टी तीसरे या उससे नीचे स्थान पर रही, उसे जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले. इन सीटों में से चिराग की पार्टी ने 27 सीटों पर जदयू को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया, जहां वह दूसरे स्थान पर रही. बिहार की एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया, ” लोजपा ( रा वि ) को अभी भी अपनी योग्यता से ज्यादा सीटें मिली है. हम शुरू में पार्टी के 20 से ज्यादा सीटों के पक्ष में नहीं थे. फिर इसे बढ़ाकर 23 और फिर 26 कर दिया गया क्योंकि चिराग लगातार दबाव बना रहे थे. गठबंधन को मजबूत और एकजुट बनाए रखने के लिए, हम 29 सीटों पर सहमत हुए हैं. ” एक अन्य भाजपा नेता ने कहा, ” चिराग पासवान ने बहुत जोर लगाया. चूंकि वह केंद्र में एक प्रमुख सहयोगी हैं, इसलिए हमें उनकी मांगे माननी पड़ी. लोजपा ( रा वि ) ने 40 सीटों से शुरुआत की, फिर 35 और अंततः 29 सीटों पर समझौता कर लिया. प्रधानमंत्री के फोन के बाद जीतन राम मांझी 6 सीटों पर राजी हो गए. बताया जा रहा है कि उन्होंने भविष्य में 1 एमएलसी पद की मांग की है.”

उपेंद्र कुशवाहा को मिली 6 सीट

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 6 सीटों पर सहमति जताई, क्योंकि उसे आश्वासन दिया गया था कि उपेंद्र कुशवाहा को अप्रैल में कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी राज्यसभा सीट दी जाएगी . सूत्रों के मुताबिक, रालोमो महुआ, उजियारपुर, सासाराम, दिनारा, मधुबनी और बाजपट्टी सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं .

2020 में एनडीए के तीन बड़े दलों का प्रदर्शन

जदयू : 115 सीटों पर चुनाव लड़ा, 43 सीटें जीती, वोट शेयर : 19. 46%

भाजपा : 110 सीटों पर चुनाव लड़ा, 74 सीटें जीती, वोट शेयर

39% + लोजपा : अकेले 135 सीटों पर चुनाव लड़ा, 1 सीट जीती, वोट शेयर : 5.66% सीटों के इस बंटवारे में नए उम्मीदवारों के लिए कोई जगह नहीं बची है, जिससे संभवत: मुकेश सहनी की संभावना भी खत्म हो गई है.