कांग्रेस ने 8 भूमिहार और 19 सवर्ण कैंडिडेट उतारे, आरजेडी आधे से ज्यादा उम्मीदवार यादव

हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट
बिहार चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस और राजद ने अपने कोर वोट बैंक को टिकट चयन में तरजीह दी है. इसके साथ ही सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी की है. नीतीश के वोट बैंक माने जाने वाले ईबीसी वर्ग को भी महागठबंधन में प्रमुखता से टिकट मिले हैं.
पटना/ हैदराबाद, 18 अक्टूबर, 2025. बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए से मुकाबले के लिए महागठबंधन ने अपने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की कोशिश की है. महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल( आरजेडी ) और कांग्रेस की अब तक की घोषित कैंडिडेट लिस्ट में इसके प्रयास दिखते हैं. दोनों दलों ने अपने परंपरागत वोटरों के साथ ही सर्व समाज का भी पूरा ख्याल रखा है.उधर, वाम दलों ने अपने-अपने आधार वोट बैंक को तवज्जो दी है. कांग्रेस ने 8 भूमिहार और 19 सवर्णो को टिकट दिया है. वहीं, राजद ने आधे से ज्यादा उम्मीदवार यादव समाज से उतरे हैं. बिहार में सवर्ण, दलित और मुसलमान कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं. अपनी खोयी जमीन वापस लाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस पार्टी ने सवर्ण, मुसलमान और दलित समाज से आने वाले नेताओं पर भरोसा जताया है. सवर्णो को खुले मन से टिकट देने के साथ ही इस बार पिछड़ा– अति पिछड़ा वर्ग को भी तरजीह दी है. कांग्रेस 5 मुस्लिमों को मैदान में उतारा है. वहीं, राजद ने अपने जनाधार वोट मुस्लिम और यादव का पूरा ख्याल रखा है. पार्टी ने 51 सीटों में से 28 यादवों को चुनावी मैदान में उतारा है. 6 मुस्लिमों को भी टिकट दिया गया है. वाम दल और वीआईपी ने भी समीकरण साधकर टिकट दिए हैं.
अति पिछड़ों पर विशेष मेहरबानी, नीतीश के वोट बैंक पर नजर.
महागठबंधन इस बार अति पिछड़ा वर्ग को साधने में जुटा है. टिकट बंटवारे में इसकी झलक दिख रही है. बिहार में करीब 36 फ़ीसदी आबादी वाले ईबीसी वर्ग को एनडीए खासकर नीतीश कुमार की जदयू का वोट बैंक माना जाता है. महागठबंधन शुरू से ही इस वोट बैंक में सेंध लगाने की फिराक में है. राहुल गांधी ने पटना, राजगीर सहित कई जगहों पर इस वर्ग के साथ संवाद भी किया है. यही कारण है कि कांग्रेस के अलावा आरजेडी, वीआईपी और वाम दलों ने भी अति पिछड़ा वर्ग को टिकट देकर उन्हें भी तरजीह दी है. हालांकि, अभी महागठबंधन में 40 फ़ीसदी सीटों पर प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा बाकी है. कांग्रेस ने अभी तक 50 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है. इनमें सवर्णों की बात करें तो पार्टी ने सबसे अधिक 8 भूमिहार उतारे हैं. इसके अलावा 6 ब्राह्मण और 5 राजपूत को टिकट दिया है. यानी कुल 19 सवर्ण को टिकट दिया है. जबकि पिछड़ा वर्ग से 10 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है. इनमें 4 यादव,1 कुर्मी,1 गोस्वामी,1 कुशवाहा और 3 वैश्य हैं एवं 6 अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को टिकट दिया है,वहीं, 5 मुस्लिमों को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने अनुसूचित जाति की 9 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारे हैं. एक अनुसूचित जनजाति को भी टिकट दिया है. पिछले चुनाव को देखें तो कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. 10 मुस्लिम और 13 सीटों पर दलितों को टिकट दिया था. वहीं, 10 पिछड़ा वर्ग और 3 अति पिछड़ा वर्ग को जगह दी थी .
वाम दलों ने ओबीसी को सर्वाधिक 15 टिकट दिए
लेफ्ट पार्टियों ने 29 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है. इनमें सर्वाधिक 15 सीटों पर पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट दी है. सीपीआई माले ने 19,सीपीआई ने 6 और सीपीएम ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं.