ना – ना करते हो गया गठबंधन

समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट

यह गठबंधन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले दोनों दलों के बीच बातचीत टूट चुकी थी. राइजोर दल ने शुरुआत में 27 सीटों की मांग की थी. बाद में इसे घटाकर 15 किया और अंततः 13 सीटों पर बात बन गई .

गुवाहाटी, 21 मार्च 2026 . असम विधानसभा चुनाव से पहले वहां की राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है.
लंबे समय तक कभी हां — ना तो कभी सियासी खींचतान और फिर गठबंधन से इनकार करने वाले आखिरकार राज्य के दो गोगोई अब जाकर अंततः एकजुट हो गए हैं और मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं. ये दोनों गोगोई हैं — असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और क्षेत्रीय पार्टी राइजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई. दोनों नेताओं ने गुरुवार देर रात गठबंधन हो जाने की घोषणा की. गठबंधन की घोषणा गौरव गोगोई और अखिल गोगोई ने संयुक्त रूप से किया. दोनों नेताओं ने मंच पर गमछा आदान-प्रदान कर एकजुटता का संदेश दिया. इस मौके पर अखिल गोगोई ने यहां तक कहा कि उनकी पार्टी अब गौरव गोगोई को असम का अगला मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करेगी. अखिल ने कहा, ” आज, राइजोर दल और कांग्रेस के बीच एक सहमति बन गई है… राइजोर दल ने आज से ही गौरव गोगोई को असम का मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. “

सीट शेयरिंग का फार्मूला क्या है ?

दोनों नेताओं के बीच हुए समझौते के तहत राइजोर दल असम की कुल 126 विधानसभा सीटों में से 13 पर चुनाव लड़ेंगी. इनमें से 2 सीटों ( गौरीपुर और गोलपाड़ा ईस्ट ) पर कांग्रेस के साथ ” दोस्ताना लड़ाई” होगी. बाकी 11 सीटें पूरी तरह रायजोर दल के खाते में गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने रायजोर दल के लिए 11 सीटें छोड़ी है, उनमें ढिंग भी शामिल है. यह वही सीट है जिस पर पहले असहमति के कारण बातचीत टूट गई थी. इसके अलावा इनमें मार्घरिटा भी शामिल है, जहां कांग्रेस प्रत्याशी प्रतीक बोरदोलोई ने गुरुवार को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली. उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उनके पिता, प्रधुत बोरदोलोई, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इन सीटों में शिवसागर भी शामिल है, जहां से अखिल खुद विधायक हैं और वे फिर यहां से चुनाव लड़ेंगे.

क्यों अहम है यह गठबंधन ?
यह गठबंधन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहले दोनों दलों के बीच बातचीत टूट चुकी थी. रायजोर दल ने शुरुआत में 27 सीटों की मांग की थी. बाद में इसे घटाकर 15 किया गया और अंततः 13 सीटों पर सहमति बन पाई . यह समझौता असम में विपक्षी एकता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.+ अन्य दलों का समीकरण+ गुरुवार को प्रत्याशियों की अपनी तीसरी सूची जारी करने के साथ ही, कांग्रेस ने 101 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं. असम विधानसभा की कुल 126 सीटों के लिए उसने सीटों के बंटवारे की जो व्यवस्था तय की है, उसके तहत असम जातीय परिषद 10 सीटों पर, ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस 2 सीटों पर, सीपीआई ( एम ) और रायजोर दल 11–11 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. दूसरी तरफ एनडीए में बीजेपी 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि असम गण परिषद 26 सीटों पर और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

दो दल अकेला लड़ रहे चुनाव

राज्य में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है . उसने सभी 126 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं. वहीं, एनडीए के पूर्व सहयोगी, बोडोलैंड — आधारित यूपीपीएल भी अकेले चुनाव लड़ रहा है और अब तक 18 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुका है.

राजनीतिक संदेश क्या है ?

रायजोर दल की पकड़ मुख्य रूप से ऊपरी असम के इलाकों में मजबूत मानी जाती है, जहां आरटीआई कार्यकर्ता रहे अखिल गोगोई के नागरिकता संशोधन अधिनियम ( सीएए ) विरोधी आंदोलन का गहरा असर रहा है. हाल ही में कांग्रेस के अनुभवी विधायक अब्दुल रशीद मंडल जैसे नेताओं के रायजोर दल में शामिल होने से पार्टी की सांगठनिक ताकत और स्वीकार्यता दोनों बढी है. ऐसे में कांग्रेस और राइजोर दल का यह गठबंधन स्पष्ट संकेत देता है कि विपक्ष एकजुट होकर सत्तारूढ़ गठबंधन को चुनौती देना चाहता है. माना जा रहा है कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है.