चार में से दो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेस्वरानंद सरस्वती और स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने राम मंदिर उद्घाटन में शामिल होने से इनकार कर दिया है . बाकी दो शंकराचार्य ने अभी तक अपना रूख साफ नहीं किया है.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
हरिद्वार/पुरी / चिकमगलूर/ हैदराबाद, 11 जनवरी, 2024. अयोध्या में बने राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर पूरे देश में जश्न का माहौल है. 22 जनवरी को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है, जिसे लेकर खूब तैयारी चल रही हैं . इस बीच राम मंदिर के उद्घाटन में चारों शंकराचार्यों के शामिल होने को लेकर संशय बना हुआ है. अवि मुक्तेश्वरानंद स्वामी और निश्चलानंद सरस्वती ने मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने से मना कर दिया है. उनका कहना है कि यह कार्यक्रम सनातन धर्म के नियमों को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा और वह शास्त्रों के विरुद्ध नहीं जा सकते, इसलिए वह समारोह में शामिल नहीं होंगे. स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार ( 10 जनवरी) को हरिद्वार में साफ शब्दों में कहा कि चारों शंकराचार्य राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे. स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी समझ में शामिल होने से इनकार किया है . हालांकि बाकी दो शंकराचार्यों — स्वामी भारती कृष्ण और स्वामी सदानंद सरस्वती की ओर से इसे लेकर कोई बयान अब तक नहीं आया है और नाही शामिल होने या नहीं होने को लेकर उन्होंने अपना रूख साफ नहीं किया है.
शंकराचार्य ने कहा, निर्माण कार्य पूरा होने से पहले भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा करना सही नहीं
स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद उत्तराखंड के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं . उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहा राम मंदिर उद्घाटन का कार्यक्रम धर्म ग्रंथो और नियमों के विरुद्ध है . उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुए बिना भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा करना सनातन धर्म के नियमों का पहला उल्लंघन है. स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इसके लिए कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 22 दिसंबर 1949 को आधी रात के समय विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति स्थापित की गई थी और 1992 में ढांचा गिरा दिया गया. इसलिए रामलाल की प्रतिमा को दूसरी जगह विराजमान किया गया. यह सब घटनाएं किसी वजह से अचानक से हुई थी. इसलिए उसे वक्त किसी शंकराचार्य ने सवाल नहीं उठाया था, लेकिन अब कोई जल्दबाजी नहीं है. हमारे पास राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के लिए समय है और मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए.
अवि मुक्तेश्वरानंद ने कहा, हम शास्त्रों के विरुद्ध नहीं जा सकते
शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब हम चुप नहीं रह सकते और कहेंगे कि राम मंदिर का काम पूरा किए हुए बिना उद्घाटन करना और भगवान राम की प्रतिमा वहां विराजमान करने का विचार सही नहीं है. उन्होंने कहा कि समारोह आयोजित करने वाले हो सकता है हमें एंटी मोदी कहें. लेकिन ऐसा नहीं है, हम शास्त्रों के विरुद्ध नहीं जा सकते.
क्या बोले स्वामी निश्चलानंद
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ओड़िशा की जगन्नाथ पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य हैं. उन्होंने भी मंदिर के उद्घाटन में शास्त्रों के नियमों के उल्लंघन की बात कही है . स्वामी ने कहा, ऐसा नहीं है कि मुझे कोई सुझाव नहीं लिया गया तो मैं नाराज हूं, लेकिन स्कंद पुराण के अनुसार, अगर नियमों और रीति रिवाज का सही से पालन नहीं किया जाता है तो चीजें प्रवेश कर जाती है और उसे क्षेत्र को नष्ट कर देती है. उन्होंने कहा कि उन्हें राम मंदिर के उद्घाटन के लिएनिमंत्रण मिला है, लेकिन वहअभी मंदिर नहीं जाएंगे,जब सनातन धर्म के अनुसार कार्यक्रम होगा तो वह शामिल होंगे. स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि वह अयोध्या जाते रहते हैं और वर्तमान में जहां रामलला है वहां वह माथा भी टेकने जाते हैं. उन्होंने कहा कि दोबारा वहां जाएंगे, लेकिन सही समय पर. बाकी दो शंकराचार्य की तरफ से राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने को लेकर रुख साफ नहीं किया गया है. स्वामी भारती कृष्ण दक्षिण भारत के चिकमगलूर स्थित श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य हैं, जबकि स्वामी सदानंद सरस्वती गुजरात के द्वारका में शारदा पीठ के शंकराचार्य हैं.
क्या बोले चंपत राय
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसे लेकर कहा कि राम मंदिर रामानंद संप्रदाय का है, शैव, शाक्य और संन्यासियों का नहीं. चंपत राय ने बताया कि मंदिर का निर्माण 3 फ्लोर में क्या जा रहा है और फर्स्ट फ्लोर का काम पूरा हो चुका है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा यही गर्भ गृह में की जाएगी, जिसके लिए तैयारियां चल रही है. 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन होगा और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी.