भगवान राम अपने बाल रुप में अयोध्या पधार चुके हैं . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी, संघ प्रमख मोहन भागवत प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मंदिर के अंदर मौजूद थे. लेकिन सरकार पर हावी रहने वाला विपक्ष नदारद रहा. जानते हैं 22 जनवरी के इस पावन अवसर पर विपक्षी नेता कहां थे.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की या खास रिपोर्ट.
नई दिल्ली/ कोलकाता/ हैदराबाद, 23 जनवरी, 2024. 500 सालों का इंतजार, कई बलिदान और संघर्ष खत्म हो गए. दुल्हन सी सजी अयोध्या नगरी में प्रभु राम आखिरकार पुनः वापस आ गए. वहीं अयोध्या जो त्रेतायुग में उनकी थी, जिसके वो राजा थे. 22 जनवरी( सोमवार) दोपहर 12:29 से 12:30 बजे के बीच वो 84 सेकंड के शुभ मुहूर्त में सभी भारतीयों ने रामलला की उस अलौकिक छटा के दर्शन किए . पीएम मोदी ने कहा अब हमारे राम टेंट में नहीं रहेंगे. क्रिकेट जगत, बॉलीवुड और उद्योग जगत के अलावा संतों की भीड़ इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी. लेकिन दिखाई नहीं दिया तो बस विपक्ष. जिस मंदिर ट्रस्ट ने समारोह का आयोजन किया, उन्होंने कई विपक्षी नेताओं को भी बुलाया था, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया . कुछ का कहना है कि बीजेपी धार्मिक आयोजन का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है . विपक्ष की ओर से किसी ने इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं की . तो विपक्ष था कहां और भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के समय क्या कर रहा था? जब अयोध्या में चल रही थी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा तब विपक्ष क्या कर रहा था ?
कांग्रेस कर रही भारत जोड़ो न्याय यात्रा
सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस भारत जोड़ो न्याय यात्रा के सिलसिले में असम में है . वहां राहुल गांधी 22 जनवरी को 15 वीं सदी यह समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान बटाद्रा थान जाने वाले थे. लेकिन आरोप है कि उन्हें मंदिर जाने से रोका गया . रोक लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने पूछा,’ हम मंदिर दर्शन करना चाहते हैं.’ मैंने कौन सा अपराध किया है कि मंदिर नहीं जा सकता?’ ऐसे में उपजी सियासत के बाद राहुल गांधी सहित पूरी विपक्षी पार्टी प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही शायद बटाद्रा थान जाएगी. असम के बीजेपी मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा और कांग्रेस नेताओं के बीच इस पर तीखी बहस हो चुकी है. सरमा ने गांधी से अपील की है कि वह बटाद्रा थान ना जाएं,क्योंकि इससे लगेगा कि राम मंदिर और बटाद्रा सत्र के बीच कोई प्रतियोगिता चल रही है. असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि टीवी चैनल एक तरफ राम मंदिर का समारोह दिखाएंगे, दूसरी तरफ गांधी को श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थान पर जाते हुए दिखाएंगे.
ममता बनर्जी ने निकाली रैली
अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी धार्मिक सद्भावना का संदेश देने के लिए कोलकाता में एक समानांतर रैली आयोजित की . अयोध्या समारोह के लिए निमंत्रण प्राप्त करने वाली सुश्री बनर्जी सबसे पहले प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में दर्शन किए और बाद में वे सर्व धर्म रैली का आयोजन किया. भाजपा नेता ने ममता बनर्जी पर अयोध्या समारोह से ध्यान हटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया और यहां तक कि रैली रोकने के लिए हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन असफल रहे. तृणमूल कांग्रेस ने जवाब दिया है कि उसने अतीत में भी ऐसी रैलियां आयोजित की है. दूसरी ओर ममता बनर्जी के बड़े नेता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने एक विवादित बयान दे दिया है. उन्होंने कहा कि उनका धर्म उन्हें नहीं सिखाता कि उसे पूजा स्थल को माने जाएं , जो नफरत, हिंसा और बेगुनाहों की लाशों पर बना हो.
राम पर डीएमके और बीजेपी आमने-सामने
एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक ने स्पष्ट कर दिया था कि वह एक मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद मंदिर के निर्माण से सहमत नहीं है. वहीं बीजेपी ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल अयोध्या कार्यक्रम के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर रहा था .द्रमुक ने इस आरोप का खंडन किया हैऔर भाजपा पर तमिलनाडु के सेलम में अपने युवा सम्मेलन से ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आलू लगाया है कि तमिलनाडु सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर के कार्यक्रम के सीधा प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया.
पवार, अखिलेश और लालू यादव क्या कर रहे थे
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने उन्हें आमंत्रित करने के लिए मंदिर ट्रस्ट को साधुवाद दिया है, लेकिन कहा कि वह समारोह के बाद अयोध्या राम मंदिर जाएंगे , जब वहां भीड़ कम होगी. उनके समकालीन और राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक लालू यादव भी दूर रहे. लालू यादव तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने मंदिर के लिए समर्थन जुटाने हेतु लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व वाली रथयात्रा को रोक दिया, लालू यादव ने पिछले सप्ताह मीडिया से कहा था कि वह इस कार्यक्रम को छोड़ देंगे. हालांकि उन्होंने कोई कारण नहीं बताया . अन्य विपक्षी नेताओं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि वह प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद अपने परिवार के साथ मंदिर जाएंगे. इस बीच सीपीएम की भी प्रक्रिया सामने आई है. उन्होंने पहले ही कहा था कि वह इस कार्यक्रम को छोड़ देगी, यह कहते हुए कि वह लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती है, बीजेपी के लिए धर्म को राजनीति के साथ जोड़ना सही नहीं है.
आप के कई नेता दिखे भक्ति में लीन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के सभी मंत्रियों, विधायकों, पार्षदों और कार्यकर्ताओं से शोभा यात्राओं में भाग लेने, आयोजित भंडारों में योगदान देने और लोगों की शिवा करने का आग्रह किया था. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मंत्री सौरभ भारद्वाज, आतिशी सहित कई नेताओं ने अपने आधिकारिक हैंडल पढ़ तस्वीरें साझा की.