बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में भी इंडिया गठबंधन के भीतर टूट की सुगबुगाहट तेज हो गई है. यहां जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के अलग होने की बात कही जा रही है. सूत्र बताते हैं कि सब कुछ ठीक रहा तो राहुल गांधी की यात्रा के यूपी में आते ही जयंत चौधरी इंडिया गठबंधन से खुद को अलग होने का ऐलान कर सकते हैं.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
नई दिल्ली / लखनऊ/हैदराबाद,7 फरवरी,2024.
यूपी में 14 फरवरी को राहुल गांधी की न्याय यात्रा चंदौली के रास्ते यूपी में प्रवेश करेगी . आरएलडी सूत्रों की माने तो सीट शेयरिंग को लेकर भाजपा से बातचीत चल रही है और इस पर मोहर लगते ही जयंत चौधरी इंडिया गठबंधन से अपना रास्ता अलग कर लेंगे. जयंत चौधरी पिछले 5 साल से सपा के साथ गठबंधन में है और यूपी में इंडिया गठबंधन के धुरी माने जाते रहे हैं . हाल ही में अखिलेश यादव ने समझौते के तहत जयंत चौधरी को यूपी में 7 सीटें देने का भी ऐलान किया था.
अखिलेश ने जयंत को दी थी 7 सीटें
19 जनवरी को अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के साथ 2024 का चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. समझौते के तहत अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लोकसभा की 7 सीटें देने की बात कही थी. लेकिन अखिलेश ने जयंत चौधरी को बागपत, मुजफ्फरनगर, कैराना, बिजनौर, मथुरा, हाथरस, और अमरोहा सीट समझौते के तहत देने का वादा किया था.
आरएलडी को 7 सीटें क्यों दी गई?
7 सीटें देने की सबसे बड़ी वजह आरएलडी से राज्य स्तरीय दर्जा छिन जाना है. 2023 में चुनाव आयोग ने कम वोट प्रतिशत का हवाला देते हुए आरएलडी से राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया था. अब इसे फिर से हासिल करने के लिए जयंत चौधरी को लोकसभा चुनाव में कुल वैध मतों का 8% मत लाना होगा. वहीं, इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे का फॉर्मूला विधानसभा के आधार पर ही तय किया गया . विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने आरएलडी को 33 सीटें दी थी. अगर लोकसभा में यह गणित देखा जाए, तो
56 यानी 7 सीट के आसपास बैठता है .
फिर अखिलेश से जयंत क्यों नाराज ?
समझौते के तहत 7 सीट मिलने के बावजूद अखिलेश यादव से जयंत चौधरी नाराज क्यों हैं, यह सवाल सियासी गलियारों में सुर्खियों में है .
सिंबल तुम्हारा और प्रत्याशी हमारा वाली शर्त
सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव ने समझौते के तहत 7 सीटें तो देने का ऐलान कर दिया, लेकिन उनकी एक शर्त ने छोटे चौधरी को नाराज कर दिया है. शर्त के मुताबिक, आरएलडी के हिस्से में आई 7 में से 4 सीटों पर सिंबल तो आरएलडी का होगा लेकिन प्रत्याशी का नाम सपा तय करेगी . आरएलडी सूत्रों का कहना है कि जयंत चौधरी पर
कैराना से इकरा हसन, मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक, मथुरा से श्याम सुंदर शर्मा और बिजनौर से किसी सपाई को प्रत्याशी बनाने का दबाव है. सूत्र बताते हैं कि जयंत चौधरी ने जब इस प्रस्ताव को कैडर के सामने रखा, तो सभी ने सिरे से खारिज कर दिया . आरएलडी नेताओं का कहना है कि सिर्फ दो सीटों के लिए समझौता क्यों करेंगे ?
उधर, समाजवादी पार्टी ने अमरोहा सीट को जयंत चौधरी के खाते में डाल दिया है. इसी पर मौजूदा सांसद कुंवर दानिश अली हैं. जिनके कांग्रेस से लड़ने की चर्चा है. यह सीट मुस्लिम और जाट बहुल है.