12 फरवरी को नीतीश की बचेगी कुर्सी या लगेगा राष्ट्रपति शासन ? चौराहों पर एक ही चर्चा

12 फरवरी को बिहार विधानसभा का कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्य में राजनीतिक पारा हाई है. तमाम दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की जुगत में जुटे हैं. आरजेडी जिस मजबूती से कह रही है कि 12 फरवरी को खेला होगा, उसके बाद से राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है.

हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.

पटना/हैदराबाद,9 फरवरी, 2024. बिहार की राजनीति पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं. इस संशय का आलम यह है कि लगभग सभी दल अपने-अपने विधायकों को संदेह की नजर से देखने लगे हैं . हालत यह हो गई कि बिहार की राजनीति पर पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा राजद नेता तेजस्वी यादव का वह बयान हावी हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खेल तो होगा. बिहार के विधायकों की चर्चा दिल्ली से तेलंगाना तक हो रही है. प्रत्येक दल अपने अपने हिसाब से विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में है .

विधानसभा अध्यक्ष के तेवर से सत्ता दल परेशान

बिहार विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी के तेवर से सत्ता दल की बौखलाहट बढ़ गई है . ऐसा नहीं कि अविश्वास प्रस्ताव झेलने वाले अवध बिहारी चौधरी कोई पहले विधानसभा अध्यक्ष हैं . इसके पहले, विधानसभा अध्यक्ष शिवचंद्र झा, बिंदेश्वरी वर्मा, और 2022 में बीजेपी के विजय कुमार सिन्हा पर भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. लेकिन अवध बिहारी चौधरी इस मामले में उन सब विधानसभा अध्यक्ष से अलग है . अवध बिहारी चौधरी पहले विधानसभा अध्यक्ष होंगे जो अपने ऊपर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगे. पत्रकारों से बातचीत में अवध बिहारी चौधरी ने साफ तौर से कहा – मैं इस्तीफा नहीं दूंगा . अविश्वास प्रस्ताव का सदन में सामना करूंगा. शेष विधानसभा अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले इस्तीफा दे दिया था. अवध बिहारी चौधरी की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद सत्ता दल में भी विधायकों के टूटने का खौफ है. खेला तो 12 फरवरी को होगा. सीएम नीतीश भी डर गए हैं. इसलिए भागे — भागे पीएम मोदी से मिलने चले गए और उनसे कह रहे हैं कि अब हम आपके साथ रहेंगे. दरअसल, जदयू के विधायकों में नीतीश के प्रति काफी नाराजगी है. इसकी वजह है कि नीतीश कुमार ब्यूरोक्रेट्स को प्राथमिकता देते हैं. चारों तरफ अधिकारी हावी है. विधायक जनता का प्रतिनिधि होता है . लेकिन जनता का कोई काम नहीं हो रहा है. इसलिए ज्यादा मत बोलवाइए, 12 फरवरी को खेला देखिए और शाम को मिलिए .

संभावना क्या है ?

मुख्यमंत्री नीतीश की माने तो एनडीए की सरकार पूर्ण बहुमत में है . एनडीए के पास सरकार बनाए रखने के मैजिक नंबर से ज्यादा विधायकों का समर्थन है. ऐसे में एनडीए की सरकार अपनी गति से आगे बढ़ेगी और अगर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दावे में दम होगा तो अविश्वास प्रस्ताव गिर भी सकता है . यह तभी संभव होगा जब सत्ता पक्ष के विधायक अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध क्रॉस वोटिंग करें या सरकार बनाने के मैजिक नंबर को ध्वस्त करके सत्ता पक्ष के विधायक सदन की कार्रवाही से खुद को अलग रखें यानी सदन से ही गायब हो जाए. ऐसे में मुख्यमंत्री के पास दो विकल्प हैं . पहला विकल्प राज्यपाल के हाथ अपना इस्तीफा दे देंगे. दूसरा विकल्प यह है कि नीतीश मंत्रिमंडल की बैठक में सदन को भंग करने देने की घोषणा करें और राज्यपाल को इसकी जानकारी दें. अब राज्यपाल पर निर्भर है कि सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी को सरकार बनाने का न्योता दें या फिर विधायकों के खरीद फरोख्त को रोकने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू कर दें .