
बिहार विधानसभा में कल यानि सोमवार को होने वाले विश्वास मत से पहले राष्ट्रीय जनता दल ( आरजेडी ) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री तथा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा – सेकुलर( एचएएम – एस ) के प्रमुख जीतन राम मांझी के पास अपना दूत भेजा.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो प्रमुख देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट .
पटना/ हैदराबाद, 11 फरवरी, 2024. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले इंडिया गठबंधन के कुछ नेताओं और मार्क्सवादी लेनिनवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक महबूब आलम भी माझी से मुलाकात करने पहुंचे. मांझी की दोनों के साथ चर्चा बंद दरवाजों के पीछे हुई जो तकरीबन आधे — आधे घंटे तक चली. द हिंदू अख़बार लिखता है कि लालू प्रसाद यादव ने कथित तौर पर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की है और कहा है कि अगर बिहार में विपक्ष की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद उन्हें दिया जाएगा. विधानसभा में एचएएम — एस के चार विधायक हैं.+ एनडीए से नाराज मांझी+ 5 दिन पहले उन्होंने राज्य में हाल ही में बनी एनडीए सरकार में अपने बेटी संतोष कुमार सुमन को दिए पोर्टफोलियो को लेकर नाराजगी जताई थी . गया में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि ” 1948 से लेकर 2013 तक मै अनुसूचित जाति विकास विभाग में मंत्री रहा और मेरे बेटे को भी वही विभाग दिया गया है. उन्होंने सवाल किया कि सड़क निर्माण या जल संसाधन उन्हें क्यों नहीं दिए गए . सूत्रों के मुताबिक हम पार्टी ने अपने विधायकों के लिए व्हीप जारी किया और कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दिन वह लोग सदन में मौजूद रहें. मांझी के राजनीतिक सलाहकार दानिश रिजवान का कहना है कि व्हीप का नाता इस बात से नहीं है कि इसे वोट देना है और किसे नहीं, विधायकों से कहा गया है कि उसे दिन वह सदन में जरूर उपस्थित रहें. दूसरी तरफ महबूब आलम ने कहा है कि माझी से उनकी मुलाकात का मतलब विश्वास मत से नहीं है. उन्होंने कहा, मैं उनका हाल-चाल जानने आया था और वह अभी पूरी तरह स्वस्थ हैं . खेल कैसे खेलना है यह उन्हें पता है. वह गरीबों की आवाज बने रहे हैं. मैंने उनसे कहा कि वह गरीबों के लिए काम करते रहें.

फ्लोर टेस्ट से पहले जारी है खींचतान
विश्वास मत से पहले आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं. शनिवार को जेडीयू ने कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार के यहां अपने सभी विधायकों को लंच के लिए बुलाया था. माना जा रहा है कि पार्टी विधायकों की गिनती करना चाहती थी, लेकिन इसमें 45 विधायकों में से सात विधायक लंच में शामिल नहीं हुए. बाद में श्रवण कुमार ने मीडिया से कहा, जो लोग लंच में नहीं आए, उनकी पहले से व्यस्तता थी. उधर विश्वास मत से पहले कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया . वह सभी विधायक कल सुबह पटना जाएंगे. वहीं, बीजेपी ने बोधगया में अपने सभी विधायकों को कैद कर रखा है. वह सभी विधायक कल पटना पहुंचेंगे. बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. आंकड़ों के अनुसार एनडीए के पास फिलहाल 128 विधायक हैं, उनमें बीजेपी के 78, जदयू के 45, हम के 4 और1 निर्दलीय विधायक हैं. जबकि महागठबंधन के पास 114 विधायक हैं . आरजेडीके 79, कांग्रेस के 19, और वाम दलों के 16 विधायक हैं . इस बीच 12 फरवरी यानी कल सोमवार को नीतीश सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. इससे पहले बिहार की राजनीति गरमाई हुई है . विधायकों के छिटकने की आशंका के बीच सभी पार्टियां एक्शन में है. लगातार विधायकों के साथ संपर्क साध रखी जा रही है. वहीं, फ्लोर टेस्ट से पहले झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम ने इसको लेकर कई बातें कही है. उन्होंने रविवार को कहा कि बिहार में फ्लोर टेस्ट जदयू के लिए आसान नहीं होने वाला है. एनडीए की राह भी मुश्किल होने वाला है. आलमगीर ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार पाला बदल रहे हैं. यह सब बिहार की जनता देख रही है. नीतीश कुमार को राजनीतिक नुकसान पहुंचेगा. आलमगीर ने कहा कि बिहार के एक दर्जन से अधिक विधायक गायब हैं . फ्लोर टेस्ट आसान नहीं होने वाली है क्योंकि जीडीयू से लोग दिख रहे हैं.