पशुपति पारस ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. पशुपति पारस के पास खाद्य प्र संस्करण उद्योग मंत्रालय था .
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
नई दिल्ली/ पटना/हैदराबाद,19 मार्च,2024. पशुपति पारस ने आज मंगलवार को मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा तब की है, जब एक दिन पहले ही बिहार में एनडीए ने लोकसभा चुनाव के लिए सीटों की साझेदारी की घोषणा की थी. हालांकि, अब जब लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, ऐसे में पारस का मंत्री पद से हटना ही था . पशुपति पारस के लिए सोमवार को ही भाजपा ने संदेश दे दिया था कि उनके लिए एनडीए में अब जगह नहीं है. बीजेपी ने चिराग पासवान को एनडीए में शामिल किया है और उन्हें 5 सीटें दी है. कहा जा रहा है कि चिराग पासवान ने बीजेपी के सामने शर्त रख दी थी कि या तो उनके चाचा एनडीए में रहेंगे या तो फिर वह. बीजेपी ने चिराग को साथ रखना पसंद किया और उनके चाचा को बाहर होना पड़ा.
समय का पहिया घूमा
अक्टूबर 2020 में रामविलास पासवान का निधन हुआ था. उनका निधन मोदी कैबिनेट में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रहते ही हुआ था . उम्मीद की जा रही थी कि उनके बाद मंत्रालय चिराग पासवान को मिलेगा. लेकिन बीजेपी ने उनके चाचा पशुपति पारस को मंत्री बना दिया था. चिराग पासवान अलग-अलग पड़ गए थे . सोमवार को यानी 19 मार्च को एनडीए ने सीटों की साझेदारी की घोषणा की तभी स्पष्ट हो गया था कि पशुपति पारस के पास अब अलग होने के सिवा कोई विकल्प नहीं है. मंगलवार यानी आज 19 मार्च को पशुपति पारस मीडिया के सामने आए और मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई.
पशुपति परसने क्या कहा
पशुपति पारस से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह इंडिया गठबंधन में शामिल होंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा— पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद हम फैसला लेंगे कि अब क्या करना है. पशुपति पारस के पास राजनीति का चार दशक से ज्यादा का अनुभव है लेकिन रामविलास पासवान जब तक जिंदा रहे, पशुपति पारस उनके मातहत ही काम करते थे. जब रामविलास पासवान केंद्रीय मंत्री थे तब पारस बिहार के लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे . जब उन्होंने पार्टी तोड़ी तो खुद ही लोजपा के अध्यक्ष बन गए. पारस ने चुनावी राजनीति की शुरुआत 1998 में खगड़िया जिले के
अलौली विधानसभा सीट से विधायक बनकर की थी . इस सीट से रामविलास पासवान भी विधायक बने थे . 2017 में पशुपति पारस बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल का भी हिस्सा बने थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में पशुपति पारस हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे और उन्हें जीत मिली. हाजीपुर सीट से रामविलास पासवान सांसद चुने जाते थे. बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं. एनडीए के भीतर सीटों का बंटवारा हो गया है. बीजेपी 17, जदयू 16, लोजपा( आर )5, उपेंद्र कुशवाहा एक और जीतन राम मांझी भी एक सीट पाकर खुश नहीं है .
कुशवाहा की नाराजगी?
बीजेपी बिहार के प्रभारी विनोद तावड़े ने जब सीटों की साझेदारी की घोषणा की तो संयुक्त प्रेस वार्ता में उपेंद्र कुशवाहा मौजूद नहीं थे. कुशवाहा चाहते थे कि उन्हें कम से कम दो सीटें मिलें. नीतीश कुमार की पार्टी में अपने विलय के बाद से कुशवाहा को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. उधर, लवली आनंद के बेटे चेतन आनंद आरजेडी के विधायक हैं, लेकिन बिहार विधानसभा में विश्वास मत के दौरान वह एनडीए खेमे में आ गए थे. अब लवली आनंद भी औपचारिक रूप से जदयू में शामिल हो गई हैं . इस बीच हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को गया सीट मिली है. जहां से जदयू के मौजूदा सांसद विजय कुमार है . कहा जाता है कि लोजपा में चाचा भतीजे के बीच तुत कराने में नीतीश की पार्टी की भी भूमिका थी और इसे 2020 के विधानसभा चुनाव के प्रतिशोध के रूप में देखा जाता है. चिराग पासवान ने 2020 में जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे. नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद इसमें ताकत जरूर आई है, लेकिन उसे आरजेडी के नेतृत्व वाले गठबंधन का सामना लोकसभा चुनाव में करना होगा.