लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार एनडीए का कुनबा बढ़ाया है . कई दिनों से अटकलें चल रही थी कि ओड़िशा की 21 संसदीय सीटों और 147 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे चुनाव के लिए भाजपा और बीजू जनता दल का गठबंधन हो सकता है. कई दौर की वार्ता भी हुई लेकिन शुक्रवार को भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि वह ओड़िशा में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट.
नई दिल्ली/ भुवनेश्वर /हैदराबाद,23 मार्च, 2024. भाजपा और ओड़िशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल के बीच चले आ रहे वैचारिक तालमेल को इस बार चुनावी गठबंधन तक ले जाने के कई दिनों से चल रहे प्रयास आखिरकार विफल हो गए. अब तस्वीर साफ हो गई है कि दोनों ही दल विधानसभा के साथ ही लोकसभा चुनाव में भी एक – दूसरे के विरुद्ध ताल ठोकेंगे . संकोच के साथ समझौते के सूत्रधार यूं तो दोनों ओर से व्यक्त की गई असहमति के कई बिंदु होंगे, लेकिन खास तौर पर मजबूत होती जा रही भाजपा के साथ अपनी सियासी जमीन साझा करने और मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने में बीजद के संकोच के साथ ही समझौते के सूत्रधार बनकर राजनीति में सक्रिय हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के विश्वस्त पूर्व नौकरशाह वीके पांडियन की महत्वाकांक्षा को बड़ा कारण माना जा रहा है.
भाजपा — बीजद अलग-अलग लड़ेंगे चुनाव
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार एनडीए का कुनबा बड़ा किया है. कई दिनों से अटकलें चल रही थी कि ओड़िशा की 21 संसदीय सीटों और 147 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे चुनाव के लिए भाजपा और बीजू जनता दल का गठबंधन हो सकता है. इसके लिए प्रयास चल रहे थे, कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन शुक्रवार को ओड़िशा भाजपा के अध्यक्ष मनमोहन सामल की ओर एक्स पर पोस्ट साझा कर स्पष्ट कर दिया गया कि भाजपा ओड़िशा में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. बढ़ती दोस्ती में आई खटास को सामल के रुख से भी समझा जा सकता है.
नवीन सरकार पर आरोप
उन्होंने मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर नहीं पहुंचने का आरोप राज्य की नवीन पटनायक सरकार पर लगाया है . उन्होंने लिखा कि विगत 10 वर्षों से नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओड़िशा की उड़ीसा की बीजू जनता दल केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार के अनेक राष्ट्रीय महत्व के प्रसंगों में समर्थन देती आई है, इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.
डबल इंजन की सरकार
मनमोहन सामल ने कहा कि अनुभव में आया है कि देशभर में जहां भी डबल इंजन की सरकार रही है, वहां विकास व गरीब कल्याण के कार्यों में तेजी आई है और राज्य हर क्षेत्र में आगे बढ़े हैं. लेकिन आज ओड़िशा में मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाएं जमीन पर नहीं पहुंच पा रही है, जिससे राज्य के गरीब बहनों और भाइयों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है . ओड़िशा – अस्मिता, ओड़िशा – गौरव और ओड़िशा के हित से जुड़े अनेक विषयों पर हमारी चिंताएं हैं .
राजनीतिक दोस्ती को अमली जामा
सूत्र बताते हैं कि इस गठबंधन के लिए सूत्रधार की भूमिका पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले 5- टी के अध्यक्ष व पूर्व आईएएस अधिकारी वीके पांडियन निभा रहे थे. वह इस राजनीतिक दोस्ती को अमली जामा पहनाकर राज्य की राजनीति में अपना रुतबा बढ़ाना चाहते थे. इससे बीजू जनता दल के वरिष्ठ नेताओं में भी असंतोष था .
संघर्ष से पार्टी की जमीन मजबूत
इस बीच लोकसभा में पार्टी के नेता भृतहरि महताब ने तो त्यागपत्र तक दे दिया. इसके अलावा भाजपा लोकसभा चुनाव में बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहती थी. इसका प्रस्ताव था कि भाजपा 13 सीटों पर लड़े और बीजू जनता दल 8 पर. बीजद इसके लिए तैयार नहीं था तो भाजपा के स्थानीय नेताओं का भी मत था कि विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल से संघर्ष पार्टी की जमीन मजबूत करेगा.