प्रेस वार्ता में याचिका कर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कम से कम 30 फर्जी कंपनियों ने 143 करोड़ रुपए से अधिक के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद कर भाजपा को चंदा दिया.
हैदराबाद से तेलंगाना ब्यूरो चीफ देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट.
नई दिल्ली/हैदराबाद,24 मार्च,2024. इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगाने और इससे जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे याचिका कर्ताओं ने शुक्रवार( 22 मार्च) को बताया कि सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) और आयकर विभाग( आईटी ) की जांच का सामना कर रही 41 कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 2471 करोड रुपए दिए और इनमें से 1698 करोड रुपए इन एजेंसियों के छापों के बाद दिए गए. पत्रकार वार्ता में याचिका कर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कम से कम 30 फर्जी कंपनियों ने 143 करोड़ रुपए से अधिक के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद कर भाजपा को चंदा दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से 172 प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट और प्रोजेक्ट हासिल करने वाले 33 कंपनियों ने भी चुनावी बॉन्ड के माध्यम से चंदा दिया है. प्रशांत भूषण ने बताया कि भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 1751 करोड रुपए का चंदा देने वाली इन 33 कंपनियों को सरकार की ओर से मिले प्रोजेक्ट और कॉन्ट्रैक्ट से कुल 3.7 लाख करोड रुपए मिले है.
भूषण बोले — चार कैटेगरी में भ्रष्टाचार कर रही भाजपा
प्रशांत भूषण ने दावा किया कि कल्पतरु समूह ने पिछले साल 3 अगस्त को आईटी विभाग की छापेमारी के तीन महीने के अंदर भाजपा को 5.5 करोड़ रुपए दिए गए थे. उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए चार श्रेणियां में भ्रष्टाचार किया गया. उन्होंने कहा, ” पहला है – चंदा दो, धंधा लो. दूसरा है– हफ्ता — वसूली( जबरन वसूली ) तीसरा है- ठेका लो, रिश्वत दो और चौथा है– फर्जी कंपनी. इलेक्टोरल बॉन्ड से किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठन हो सीट “+ इस मामले में याचिका डालने वाली और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने स्वतंत्र जांच की मांग की है. उन्होंने कहा,” जांच करता की जांच कौन करेगा”? इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक स्वतंत्र सीट का गठन किया जाना चाहिए.”