हैदराबाद से समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट
औरंगज़ेब ने 49 साल तक शासन किया जिसमें से अपने जीवन के अंतिम 25 साल तक इस मुगल बादशाह ने मराठाओं के खिलाफ युद्ध लड़ा
मुंबई/ अहमदनगर/ हैदराबाद, 18 मार्च, 2025. औरंगजेब को लेकर महाराष्ट्र में शुरू हुआ घमासान अब इस मुगल शासक की कब्र को खोदने तक पहुंच गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग का समर्थन किया है . हाल ही में आई बॉलीवुड फिल्म” छावा” की रिलीज के बाद औरंगजेब को लेकर जो सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश में कई जगहों पर जबरदस्त बहस और आगजनी शुरू हो गई है.
मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और बीजेपी के सांसद उदयनराजे भोसले ने औरंगजेब को’ चोर ‘ कहा है. लेकिन अगर आप इतिहास में झांकेंगे तो पता चलेगा कि मराठा शासको का नजरिया ऐसा नहीं था . 1674 से 1818 तक चल मराठा संघ के दौरान मुगल स्मारकों के प्रति मराठा शासको का रवैया संतुलित था. मराठाओं ने अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए मुगल शासन में बनाई गई संरचनाओं के प्रति सम्मानजनक रवैया अपनाया.
अहमदनगर में हुई थी औरंगजेब की मौत
ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, मराठा साम्राज्य के 5 वें शासक और छत्रपति शिवाजी महाराज के पोते छत्रपति साहू प्रथम श्रद्धांजलि देने के लिए औरंगजेब की कब्र पर गए थे.
औरंगजेब का महाराष्ट्र से क्या कनेक्शन, मराठा समुदाय क्यों मानता है इस मुगल शासक को अपना दुश्मन?+
छठे मुगल सम्राट औरंगजेब की 3 मार्च, 1707 अहमदनगर ( महाराष्ट्र) में 88 वर्ष की उम्र में हुई थी . औरंगजेब ने 49 साल तक शासन किया जिसमें से अपने जीवन के अंतिम 25 साल तक इस मुगल बादशाह ने मराठाओं के खिलाफ युद्ध लड़ा . युद्ध लड़ने के बावजूद, औरंगजेब का सूफी संतों के प्रति गहरा लगाव था . औरंगजेब के पास स्थित रौजा नाम की जगह से विशेष लगाव था . इस जगह को अब खुल्दाबाद कहा जाता है . यह इलाका औरंगाबाद शहर से लगभग 26 किमी दूर है और इसे सूफी संतों के लिए पहचाना जाता है.
कैसा था औरंगजेब का शासन, भारत और पाकिस्तान में इस मुगल शासक के बारे में इतिहासकारों ने क्या कहा ?
136 किमी दूर क्यों दफनाया गया औरंगजेब का शव ?
औरंगजेब ने अपनी वसीयत में इच्छा जताई थी कि उसे सूफी संत जैनुद्दीन शिराजी की दरगाह के पास दफन किया जाए. औरंगजेब का निधन अहमदनगर में हुआ था लेकिन इच्छा के मुताबिक, उसके शव को 136 किमी दूर खुल्दाबाद में ले जाया गया और जहां दफनाया गया . खुल्दाबाद का नाम औरंगजेब के सम्मान में रखा गया क्योंकि यह कहा गया कि मौत के बाद ‘ उसका निवास स्वर्ग में है.’ औरंगजेब की कब्र साधारण सी है . औरंगजेब के बारे में कहा जाता है कि उसने अपनी कब्र को बनाने के लिए सिर्फ 14 रुपए 12 आने खर्च किए थे और यह वह रकम थी जो उसने अपने आखिरी वक्त में टोपियाँ बुनकर कमाई थी. एएसआई ने औरंगजेब की कब्र के बारे में कहा है,’ कब्र में जो प्रवेश द्वार और गोविंद बाल बरामदा है, वह 1707 एडी में जोड़ा गया था. कब्र के ऊपर केबल मिट्टी और छोटा सा सब्जा( हरा पौधा) है. यह कब खुली छत के नीचे है .
18 साल तक मुगलों की कैद में रहे साहू प्रथम
ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि औरंगजेब की मौत के बाद जब साहू प्रथम को रिहा किया गया तो वह मुगल शासक की कब्र पर गए. साहू प्रथम को सिर्फ 7 साल की उम्र में मुगलों ने सलाखों के पीछे डाल दिया था और उन्हें 18 साल तक मुगलों की कैद में रहना पड़ा. लेकिन जब जेल से रिहा किया गया तो वह खुल्दाबाद गए और औरंगजेब की कब्र पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी. यह घटना महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रकाशित ‘ मराठा कालखंड ‘ में दर्ज है. इसके अलावा, इतिहासकार रिचर्ड ईटन की किताब में साहू प्रथम के औरंगजेब की कब्र पर जाने का जिक्र मिलता है .
दिल्ली में लाल किले पर मराठाओं का हमला
इतिहास को खंगालने पर यह भी पता चलता है कि मराठा शासन के दौरान ज्यादातर मुगल स्मारक
, जिसमें औरंगजेब की कब्र भी शामिल है सुरक्षित रहे. लेकिन कभी-कभी लूटपाट की घटनाएं भी हुई. एक उदाहरण 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई से ठीक पहले दिल्ली में लाल किले पर हमले का है. मराठों ने दिल्ली
कूच के दौरान दीवान -ए – खास को लूट लिया था, जहां मुगल सम्राट दरबारियों और मेहमानों से मिलते थे. शिवसेना ( उद्धव ) के नेता संजय राउत के मुताबिक, महाराष्ट्र में बीजेपी का शासन औरंगजेब के वक्त से भी बदतर है.